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IFS Transfer List: राजस्थान में 69 IFS अधिकारियों के तबादले, PCCF का पदनाम भी बदला

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जयपुर, 11 अगस्त 2026 (कैबिनेट डेस्क): राजस्थान सरकार ने भारतीय वन सेवा (IFS) के 69 अधिकारियों के तबादले-पदस्थापन का आदेश सोमवार आधी रात को जारी किया है। कार्मिक विभाग की ओर से निकला यह आदेश वन प्रशासन के शीर्ष पद से लेकर क्षेत्र स्तर तक – सभी स्तरों पर एक साथ फेरबदल लेकर आया है। सबसे बड़ी खबर यह है कि विभाग के मुखिया अरिजीत बनर्जी का पदनाम बदल दिया गया है। अब उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हैड ऑफ फोरेस्ट फोर्स के रूप में जाना जाएगा। इसके अलावा 14 वरिष्ठ IFS अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज भी सौंपे गए हैं।

पांच बड़े फैसले जो इस तबादला सूची की धड़कन हैं

विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह तबादला सूची पिछले कई महीनों से लंबित थी और सोमवार देर रात इसे अंतिम रूप दिया गया। पांच ऐसे निर्णय हैं जो सूची की असली अहमियत तय करते हैं:

पहला – विभागाध्यक्ष का नया पदनाम। अरिजीत बनर्जी अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक के साथ-साथ हैड ऑफ फोरेस्ट फोर्स के रूप में भी काम करेंगे। इसका मतलब है कि वन बल के परिचालन और प्रशासनिक नियंत्रण का अधिकार अब एक ही हाथ में केंद्रित हो गया है।

दूसरा – मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व को नया क्षेत्र निदेशक। डॉ. टी. मोहन राज को कोटा स्थित मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व का प्रमुख बनाया गया है। यह रिजर्व वाइल्डलाइफ कंजरवेशन के लिहाज से प्रदेश का सबसे सेंसिटिव ईको-सिस्टम है।

तीसरा – रामगढ़ विषधारी को नया क्षेत्र निदेशक। सुगनाराम जाट के कंधों पर अब रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की बड़ी जिम्मेदारी है। बीकानेर संभाग में स्थित यह रिजर्व मरुस्थलीय बाघ परियोजना के लिए मील का पत्थर माना जाता है।

चौथा – पर्यावरण विभाग को नई सचिव। शैलजा देवल को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव के साथ-साथ राज्य स्तरीय वन सलाहकार समिति (SIYA – State Integrated Working and Action Plan for Wildlife & Habitat Authority) की सदस्य सचिव भी बनाया गया है।

पांचवां – 14 अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज। एक ही सूची में इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त प्रभार देना यह संकेत देता है कि सरकार ने फैसलों को तेजी से लागू करने की रणनीति अपनाई है ताकि कोई पद खाली न रहे।

शीर्ष प्रशासनिक स्तर: कौन कहां पहुंचा

पीसीसीएफ और अतिरिक्त पीसीसीएफ स्तर पर जो महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं, उनकी पूरी सूची इस प्रकार है:

अधिकारी का नामनई पदस्थापनारैंक / भूमिका
अरिजीत बनर्जीपदनाम बदला – PCCF & HoFFप्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हैड ऑफ फोरेस्ट फोर्स
अनुराग भारद्वाजप्रधान मुख्य वन संरक्षक (IT)PCCF IT
वेंकटेश शर्माअतिरिक्त PCCF, कार्य आयोजना एवं वन बंदोबस्तAPCCF
अनूप के. आर.मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव एवं इको-टूरिज्मCF
उदय शंकरअतिरिक्त PCCF, संरक्षण, प्रबोधन एवं मूल्यांकनAPCCF
राजेश कुमार गुप्ताअतिरिक्त PCCF, NTFP एवं उत्पादनAPCCF
शैलजा देवलपर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव + SIYA सदस्य सचिवसचिव
विजय एन.मुख्य वन संरक्षक (संस्थापन)CF
डॉ. टी. मोहन राजक्षेत्र निदेशक, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व, कोटाक्षेत्र निदेशक

क्षेत्रीय स्तर: मुख्य वन संरक्षक और वन संरक्षक कहां-कहां

इसके अलावा क्षेत्रीय और आंचलिक स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया गया है। जिला स्तरीय वन प्रशासन की रीढ़ मुख्य वन संरक्षक (CF) और वन संरक्षक होते हैं, और इन पदों पर नई तैनाती से पूरे प्रदेश में वन प्रबंधन का रुख बदलेगा:

मुख्य वन संरक्षक (CF) स्तर:

अधिकारी का नामनई पदस्थापनाक्षेत्र
रूप नारायण मीणामुख्य वन संरक्षक, कोटाआंचलिक स्तर
महेश कुमार गुप्तामुख्य वन संरक्षक, अजमेरआंचलिक स्तर
सेडूराम यादवमुख्य वन संरक्षक, बीकानेरआंचलिक स्तर
सुगनाराम जाटवन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्वटाइगर रिजर्व
शशि शंकरवन संरक्षक, वन्यजीव, जोधपुरवन्यजीव

वन संरक्षक स्तर पर अन्य महत्वपूर्ण पदस्थापनाएं:

  • सोनल जोरिहार – वन संरक्षक, अनुसंधान एवं पदेन राज्य सिल्वीकल्चरिस्ट। वन अनुसंधान से जुड़ी सभी परियोजनाओं की अब ये कमान संभालेंगे।
  • राजेन्द्र कुमार हुड्डा – वन संरक्षक, जयपुर। राजधानी जिले की वन सुरक्षा, अतिक्रमण रोकथाम और टाइगर रिजर्व की देखरेख इनके अधीन रहेगी।
  • सुदर्शन शर्मा – वन संरक्षक, FCA जयपुर। वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act) से जुड़े मामलों की निगरानी इनकी जिम्मेदारी है।
  • मुकेश सैनी – वन संरक्षक, वन्यजीव, उदयपुर। उदयपुर संभाग के वन्यजीव अभ्यारण्यों, बाघ परियोजनाओं और इको-टूरिज्म की कमान अब इनके हाथ में है।

टाइगर रिजर्व प्रबंधन: दोनों रिजर्व को नए क्षेत्र निदेशक

यह तबादला सूची इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही आदेश में प्रदेश के दोनों मुख्य टाइगर रिजर्व को नए क्षेत्र निदेशक मिले हैं।

मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा):

  • नए क्षेत्र निदेशक: डॉ. टी. मोहन राज
  • महत्व: राजस्थान का चौथा और सबसे नया टाइगर रिजर्व। चंबल नदी के किनारे बसा यह रिजर्व सेंचुरी नदी गैंगेटिक डॉल्फिन और मगरमच्छ के लिए भी जाना जाता है। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रजनन कार्यक्रम चल रहा है।

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (बीकानेर संभाग):

  • नए क्षेत्र निदेशक: सुगनाराम जाट (वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक)
  • महत्व: दुनिया के सबसे शुष्क बाघ आवासों में से एक। यहां बाघों को रेगिस्तानी परिस्थितियों में ढालने का अनूठा प्रयोग चल रहा है। सूगनाराम जाट के पास अब इस मिशन की पूरी कमान है।

दोनों रिजर्वों का एक साथ कायाकल्प करने के पीछे राज्य सरकार की मंशा यह है कि वन्यजीव पर्यटन से आने वाली आय में इजाफा हो और स्थानीय आदिवासी समुदायों को रोजगार के नए अवसर मिलें।

डिजिटल वन प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम

तबादला सूची में एक खास मुकाम अनुराग भारद्वाज की नियुक्ति का है, जिन्हें PCCF IT के पद पर लगाया गया है। राजस्थान में वन क्षेत्र का डिजिटलीकरण अब तक अधूरा था। GIS मैपिंग, ड्रोन आधारित निगरानी, ई-पास, फॉरेस्ट ऑफेंस ट्रैकिंग सिस्टम जैसी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की असली जिम्मेदारी अब इनके हिस्से आई है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में वन अपराधों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग, लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) टेक्नोलॉजी और AI बेस्ड कैमरा ट्रैप डेटा एनालिसिस जैसे आधुनिक उपकरण राजस्थान के वन क्षेत्र में व्यापक स्तर पर उतरेंगे।

स्थानीय स्तर पर यह तबादला क्यों अहम है?

राजस्थान में वन क्षेत्र का प्रबंधन केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है। यहां कई बड़ी चुनौतियां एक साथ हैं – अतिक्रमण, चरागाह संकट, वनाग्नि, अवैध खनन और आदिवासी अधिकार। इनमें से हर एक चुनौती से निपटने के लिए स्थानिक स्तर पर सक्रिय और उर्जावान अधिकारी जरूरी होते हैं।

अजमेर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर – पांच प्रमुख आंचलिक स्तरों पर मुख्य वन संरक्षक बदले गए हैं। इनमें से विशेष रूप से उदयपुर संभाग में मुकेश सैनी की नियुक्ति महत्वपूर्ण है, क्योंकि उदयपुर अरण्य क्षेत्र (अरावली की गिरिपाद श्रृंखला), आरावली बाघ परियोजना और वेस्टर्न राजस्थान की सीमा से सटा होने के कारण सेंसिटिव क्षेत्र है। यहां प्रभावी वन्यजीव प्रबंधन से अवैध शिकार और अतिक्रमण दोनों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही टूरिज्म, इकोटूरिज्म और सामुदायिक वानिकी की दिशा में भी तेजी आने की उम्मीद है।

प्रशासनिक महत्व: IFS-RFS विवाद के बीच यह आदेश

यह तबादला ऐसे वक्त में आया है जब हाल के महीनों में वन विभाग में IFS और RFS (राजस्थान वन सेवा) अधिकारियों के बीच पदस्थापन को लेकर विवाद चल रहा था। कुछ DCF (उप वन संरक्षक) अधिकारियों के तबादले पहले ही होल्ड पर रखे जा चुके हैं। ऐसे में 69 IFS अधिकारियों की एक बड़ी सूची का जारी होना यह संकेत है कि सरकार ने वन प्रशासन को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में RFS अधिकारियों की भी एक अलग तबादला सूची निकल सकती है।

नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें

इस फेरबदल में कुछ ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें पहली बार आंचलिक स्तर की बड़ी कमान मिली है और कुछ ऐसे भी जिन्हें विशेषज्ञता के आधार पर ईको-टूरिज्म या सिल्वीकल्चर जैसे मिशन-मोड प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ईको-टूरिज्म और अनुसंधान को नई गति:

  • अनूप के. आर. के हाथ में वन्यजीव और ईको-टूरिज्म है – इससे रणथमभोर, सरिस्का, मुकुन्दरा जैसे रिजर्व से पर्यटन राजस्व बढ़ने की उम्मीद है।
  • सोनल जोरिहार को राज्य सिल्वीकल्चरिस्ट का प्रभार मिलने से वन अनुसंधान की दिशा में नई पहल होगी।

तकनीकी आधुनिकीकरण:

  • अनुराग भारद्वाज (PCCF IT) की नियुक्ति वन प्रशासन को डिजिटल रूप से मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

जलवायु परिवर्तन से जूझने की तैयारी:

  • शैलजा देवल को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का सचिव और SIYA का सदस्य सचिव बनाना यह संकेत है कि राज्य सरकार राजस्थान में जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर लाना चाहती है।

अगले कदम: अधिकारी कब संभालेंगे कमान?

कार्मिक विभाग के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को नई पोस्टिंग का चार्ज जल्द संभालना होगा। आम तौर पर IFS अधिकारियों को दो से तीन सप्ताह का समय दिया जाता है। हालांकि, कुछ संवेदनशील पदस्थापनाओं (विशेषकर टाइगर रिजर्व) में अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से ज्वाइनिंग करने का निर्देश भी दिया जा सकता है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. राजस्थान में कुल कितने IFS अधिकारियों का तबादला हुआ है?
A: कार्मिक विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेश में भारतीय वन सेवा (IFS) के 69 अधिकारियों की तबादला-पदस्थापन सूची जारी की गई है। इसके अलावा 14 अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज भी दिया गया है।

Q2. PCCF यानी क्या और अरिजीत बनर्जी का पदनाम कैसे बदला?
A: प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) राजस्थान वन विभाग के शीर्ष पद पर बैठता अधिकारी होता है। इस बार अरिजीत बनर्जी को PCCF के साथ-साथ हैड ऑफ फोरेस्ट फोर्स (HoFF) का भी पदनाम दिया गया है।

Q3. टाइगर रिजर्व की कमान किसके पास है?
A: दोनों रिजर्वों के नए क्षेत्र निदेशक हैं – मुकुन्दरा हिल्स (कोटा) के लिए डॉ. टी. मोहन राज और रामगढ़ विषधारी के लिए सुगनाराम जाट।

Q4. उदयपुर संभाग में वन प्रशासन की नई कमान?
A: वन्यजीव, उदयपुर के पद पर मुकेश सैनी की नियुक्ति की गई है। साथ ही यहां टूरिज्म, सामुदायिक वानिकी और आरावली बाघ परियोजना से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी भी इसी आंचलिक इकाई के अधीन रहेगी।

Q5. SIYA का फुल फॉर्म क्या है और इसकी भूमिका?
A: SIYA का मतलब राज्य स्तरीय वन्यजीव व आवास प्राधिकरण (State Integrated Working and Action Plan for Wildlife & Habitat Authority) है। राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी नीतिगत संस्था है और इसके फैसले राज्य सरकार को बाध्यकारी होते हैं।

स्रोत: कार्मिक विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी IFS तबादला-पदस्थापन आदेश (10 अगस्त 2026, देर रात)।

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