भारत का युवा सिर्फ बेरोज़गारी नहीं, दिशाहीनता के संकट से जूझ रहा है। डिग्री, कोचिंग, skill mismatch और अस्थायी रोजगार के बीच खोती हुई एक पूरी पीढ़ी पर गंभीर विश्लेषण।
डिजिटल युग में खबरें बढ़ी हैं, लेकिन भरोसा घटा है। Harawal का यह editorial बताता है कि misinformation, platform fragmentation और कमजोर transparency के दौर में विश्वसनीय पत्रकारिता क्यों सबसे बड़ी सार्वजनिक आवश्यकता है।