चुनावी नतीजों के बाद संगठन पर गाज गिरना राजनीतिक दलों की पुरानी परंपरा रही है, और इस बार यह परंपरा भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने भी निभाई है। बांसवाड़ा जिले की तीन नगर निकायों के चुनाव में पार्टी का खाता तक नहीं खुलने के बाद पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत ने तत्काल प्रभाव से बांसवाड़ा जिला कार्यकारिणी को भंग करते हुए कार्यकारिणी से जुड़े सभी 31 पदाधिकारियों को हटा दिया है। वहीं, पड़ोसी डूंगरपुर जिले के अध्यक्ष को भी पद से मुक्त कर दिया गया है। यह कदम महज नतीजों पर आधारित गुस्सा है या संगठन के तीन साल पूरे होने की नियत प्रक्रिया – इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी जानते हैं इस लेख में।
मुख्य बातें
- BAP ने बांसवाड़ा जिला कार्यकारिणी भंग कर सभी 31 पदाधिकारियों को हटाया
- डूंगरपुर जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत पदमुक्त
- बांसवाड़ा की तीन निकायों में BAP को एक भी सीट नहीं मिली
- नगर परिषद के 60 वार्डों में 19, परतापुरगढ़ी में 11 और कुशलगढ़ में 7 प्रत्याशी उतारे थे; कोई नहीं जीता
- टिकट वितरण में मनमानी, भितरघात और आपसी खींचतान की लगी आरोप
- डूंगरपुर में 3 और सागवाड़ा में 4 सीटें जीतने पर पदमुक्त अध्यक्ष को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के संकेत
- पार्टी की स्थापना 10 सितंबर 2023 को; कार्यकारिणी का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने का दावा
- आगामी दिनों में जिला एकीकरण समिति की बैठक में नए जिलाध्यक्षों का ऐलान
क्या हुआ? – एक नज़र में पूरा मामला
बांसवाड़ा जिले की तीन नगर निकायों – बांसवाड़ा नगर परिषद, परतापुरगढ़ी नगरपालिका और कुशलगढ़ – के निकाय चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हुई। इस शून्य प्रदर्शन के तुरंत बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत ने तत्काल प्रभाव से बांसवाड़ा जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया और जिले से जुड़े सभी 31 पदाधिकारियों को हटा दिया। इसके साथ ही डूंगरपुर जिलाध्यक्ष को भी पदमुक्त कर दिया गया।
अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांसवाड़ा जिलाध्यक्ष प्रभुलाल बुझ समेत पूरी जिला कार्यकारिणी इस फैसले के दायरे में आई है। डूंगरपुर में जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत को उनके पद के दायित्व से कार्यमुक्त किया गया है।
चुनावी हार का पूरा हिसाब-किताब
पार्टी ने बांसवाड़ा नगर परिषद के 60 वार्डों में 20 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से एक के नाम वापस लेने के बाद 19 प्रत्याशी मैदान में रहे। परतापुरगढ़ी नगरपालिका में 12 उम्मीदवार उतारे गए, लेकिन एक आवेदन निरस्त होने के बाद 11 प्रत्याशियों ने ताल ठोकी। कुशलगढ़ में सात प्रत्याशियों को मैदान में उतारा गया था। इन तीनों जगहों से मिलाकर एक भी प्रत्याशी जीत नहीं सका।
| निकाय | उतारे गए | अंतिम प्रत्याशी | जीत |
|---|---|---|---|
| बांसवाड़ा नगर परिषद (60 वार्ड) | 20 | 19 (एक ने नाम वापस लिया) | 0 |
| परतापुरगढ़ी नगरपालिका | 12 | 11 (एक आवेदन निरस्त) | 0 |
| कुशलगढ़ | 7 | 7 | 0 |
| कुल | 39 | 37 | 0 |
टिकट वितरण में मनमानी का आरोप
बांसवाड़ा में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने के पीछे पार्टी के भीतर ही कुछ कारण बताए जा रहे हैं। पदाधिकारियों पर आरोप लगा है कि टिकट वितरण सही ढंग से नहीं किया गया। इसके चलते भितरघात और आपसी खींचतान की स्थिति बनी, जिसने पार्टी की सीटें बनाने की राह रोक दी। यानी जहां एक तरफ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, वहीं संगठन के अंदर ही समन्वय की कमी ने नुकसान पहुंचाया – यही नतीजों के बाद सख्त एक्शन की वजह मानी जा रही है।
डूंगरपुर और सागवाड़ा में जीत का इनाम
बांसवाड़ा में भले ही BAP का खाता नहीं खुला, लेकिन पड़ोस के क्षेत्रों में पार्टी ने अपनी पकड़ दिखाई है। पार्टी ने डूंगरपुर में तीन और सागवाड़ा में चार सीटें अपने नाम की हैं।
इसी के साथ जुड़ी है सबसे दिलचस्प बात – पदमुक्त किए गए डूंगरपुर जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार पार्टी के गठन से अब तक डूंगरपुर और प्रदेश स्तर पर किसी पदाधिकारी को नहीं बदला गया था; ऐसे में डूंगरपुर जिले में सात सीटें पार्टी के नाम कराने पर अनुतोष रोत को बतौर पुरस्कार बड़ा दायित्व सौंपा जा सकता है।
यानी हटाने और पुरस्कृत करने का यह फैसला एक साथ संगठन को सख्त संदेश और सफल नेतृत्व को प्रोत्साहन देने की कोशिश माना जा रहा है।
कार्यकारिणी भंग: कार्यकाल पूरा होने का दावा
राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत के मुताबिक इस कदम के पीछे सिर्फ चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि संगठन की नियत प्रक्रिया भी है। भारत आदिवासी पार्टी की स्थापना 10 सितंबर 2023 को हुई थी, और अभी हाल में पार्टी के तीन साल पूरे हो चुके हैं। जिलाध्यक्ष कार्यकाल की यही तीन साल की अवधि होने के कारण अब बांसवाड़ा और डूंगरपुर दोनों जिलों की कार्यकारिणियों का फिर से पुनर्गठन किया जाएगा।
आगे क्या? – नई कार्यकारिणी का रास्ता
पार्टी ने आगे की रूपरेखा भी साफ कर दी है:
- आगामी कुछ दिनों में पार्टी की जिला एकीकरण समिति की बैठक होगी
- इसी बैठक में बांसवाड़ा और डूंगरपुर के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी
- दोनों जिलों की कार्यकारिणियों का पुनर्गठन नई जिम्मेदारियों के साथ होगा
गौरतलब है कि यह फेरबदल ऐसे समय में हो रहा है जब राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियां चल रही हैं – ऐसे में संगठन को मजबूत चेहरों के साथ मैदान में उतारने की यह कोशिश राजनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा सकती है।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: BAP ने बांसवाड़ा जिला कार्यकारिणी क्यों भंग की?
उत्तर: बांसवाड़ा जिले की तीन नगर निकायों के चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस शून्य प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत ने कार्यकारिणी भंग करने का फैसला लिया।
प्रश्न 2: कितने पदाधिकारियों को हटाया गया है?
उत्तर: बांसवाड़ा जिला कार्यकारिणी के सभी 31 पदाधिकारियों को हटाया गया है। इसके अलावा डूंगरपुर जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत को भी पदमुक्त किया गया है।
प्रश्न 3: बांसवाड़ा में BAP का चुनावी प्रदर्शन क्या रहा?
उत्तर: बांसवाड़ा नगर परिषद में 19, परतापुरगढ़ी में 11 और कुशलगढ़ में 7 प्रत्याशी उतारे गए, लेकिन कोई भी चुनाव नहीं जीत सका – कुल मिलाकर शून्य सीटें।
प्रश्न 4: पदमुक्त डूंगरपुर जिलाध्यक्ष को बड़ी जिम्मेदारी क्यों मिल सकती है?
उत्तर: डूंगरपुर में तीन और सागवाड़ा में चार सीटें जीतकर पार्टी ने इस क्षेत्र में सात सीटें हासिल कीं। इस सफलता के चलते अनुतोष रोत को बड़े दायित्व के साथ पुरस्कृत किए जाने की संभावना जताई गई है।
प्रश्न 5: क्या यह कदम सिर्फ चुनावी हार की वजह से उठाया गया?
उत्तर: पार्टी के अनुसार कार्यकारिणियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका था (पार्टी की स्थापना 10 सितंबर 2023 को हुई थी), इसलिए पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत भी यह कदम उठाया गया है।
प्रश्न 6: नए जिलाध्यक्षों का ऐलान कब होगा?
उत्तर: आगामी दिनों में जिला एकीकरण समिति की बैठक में बांसवाड़ा और डूंगरपुर के नए जिलाध्यक्ष घोषित किए जाएंगे।
निष्कर्ष
बांसवाड़ा में शून्य सीटों के नतीजे के बाद BAP ने साफ संदेश दिया है कि खराब प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – चाहे वह टिकट वितरण की मनमानी हो या संगठन में आपसी खींचतान। एक तरफ जहां 31 पदाधिकारियों को हटाकर पार्टी ने जवाबदेही तय की है, वहीं डूंगरपुर-सागवाड़ा की सात सीटों की सफलता के लिए पदमुक्त अध्यक्ष को बड़ी जिम्मेदारी देने के संकेत बताते हैं कि पार्टी नतीजों के आकलन में अपनी टीम के प्रदर्शन को भी तौल रही है। अब सबकी निगाहें जिला एकीकरण समिति की बैठक पर होंगी, जहां नए जिलाध्यक्षों के नामों के साथ ही आने वाले पंचायती राज चुनावों के लिए BAP की नई संगठनात्मक रणनीति भी सामने आएगी।
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