जयपुर। सरहद के उन गांवों की कल्पना कीजिए, जहां मोबाइल में नेटवर्क की तलाश में छत पर चढ़ना पड़ता है, ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए कस्बे तक जाना पड़ता है और डिजिटल भुगतान की बात दूर की कौड़ी लगती है। राजस्थान सरकार अब इस तस्वीर को बदलने में जुटी है। दूरदराज, जनजातीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों तक हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है और इसी कड़ी में शासन सचिवालय में एक अहम बैठक हुई, जिसमें डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार की पूरी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान एक साथ चार बड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ रखा गया
डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार, राइट ऑफ वे (RoW) नियम-2024 का क्रियान्वयन, 4G सेचुरेशन परियोजना की प्रगति और केंद्र की पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना के तहत किए जा रहे सुधार।
मुख्य सचिव ने साफ किया कि सीमांत, जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका कहना था कि सिर्फ कनेक्टिविटी के अभाव में आमजन को सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
“सीमांत, जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कनेक्टिविटी के अभाव में आमजन सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।”
– वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव, राजस्थान
4G सेचुरेशन परियोजना: किन जिलों पर पहले फोकस?
बैठक में 4G सेचुरेशन परियोजना की समीक्षा के दौरान साफ निर्देश दिए गए कि उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में मोबाइल टावरों के लिए लंबित राजस्व भूमि का आवंटन जल्द पूरा किया जाए। साथ ही बाड़मेर और श्रीगंगानगर सहित सीमावर्ती जिलों के उन गांवों को प्राथमिकता से नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया गया, जहां अब तक मोबाइल कवरेज नहीं पहुंची है।
यह परियोजना देशभर में 4G सेवाओं के सैचुरेशन के लिए चल रही है, जिसे 27 जुलाई 2022 को करीब ₹26,316 करोड़ की कुल लागत के साथ मंजूरी दी गई थी। इसके तहत बीएसएनएल देशभर के 36,000 से अधिक गांवों तक 26,000 से ज्यादा टावरों के माध्यम से स्वदेशी 4G कनेक्टिविटी पहुंचा रही है।
राजस्थान की बात करें तो यहां 1,000 बीएसएनएल 4G सेचुरेशन साइट्स पहले ही ऑन एयर हो चुकी हैं, जिनसे पहले मोबाइल सुविधा से वंचित रहे दूरदराज इलाकों में बदलाव आया है। इसके अलावा राजस्थान में बीएसएनएल के 4G सेचुरेशन नेटवर्क रोलआउट के लिए 40 मीटर ऊंचे 200 टावरों की आपूर्ति का ₹20.5 करोड़ का ऑर्डर भी दिया गया है।
राइट ऑफ वे नियम-2024: टावर लगाने के रास्ते होंगे आसान
डिजिटल ढांचे के विस्तार में सबसे बड़ी अड़चन टावर और ऑप्टिकल फाइबर की अनुमति में होने वाली देरी होती है। इसी को दूर करने के लिए 1 जनवरी 2025 से प्रभावी नए राइट ऑफ वे नियम-2024 को सभी नगरीय निकायों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अंगीकृत करने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन की मानें तो 31 मार्च 2026 तक के सभी लंबित आरओडब्ल्यू आवेदनों का शत-प्रतिशत निस्तारण कर दिया गया है। फिलहाल आरओडब्ल्यू अनुमतियों के निस्तारण का औसत समय करीब 32 दिन है, जिसे मुख्य सचिव ने 45 दिन से कम बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
भारतनेट और ₹150 करोड़ की प्रोत्साहन राशि
बैठक में संशोधित भारतनेट परियोजना एडेंडम, कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म और समेकित बिलिंग व्यवस्था से जुड़ी शेष औपचारिकताएं समय पर पूरी करने पर जोर दिया गया। मकसद साफ है – विशेष सहायता योजना के तहत राज्य को ₹150 करोड़ की पूरी प्रोत्साहन राशि मिल सके।
एक नजर में: बैठक के मुख्य बिंदु
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| बैठक | 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी |
| अध्यक्षता | मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास |
| प्राथमिक क्षेत्र | सीमावर्ती, जनजातीय और दूरदराज गांव |
| चर्चित परियोजनाएं | भारतनेट, 4G सेचुरेशन, राइट ऑफ वे नियम-2024 |
| टावर हेतु भूमि आवंटन | उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर |
| सीमावर्ती जिले (कवरेज प्राथमिकता) | बाड़मेर, श्रीगंगानगर |
| प्रोत्साहन राशि लक्ष्य | ₹150 करोड़ |
| RoW नियम प्रभावी तिथि | 1 जनवरी 2025 |
| नियम अंगीकृत करने की समयसीमा | 30 सितंबर |
| औसत निस्तारण समय (वर्तमान) | ~32 दिन |
| लक्ष्य समय सीमा | 45 दिन से कम |
आम आदमी को क्या मिलेगा?
इस पूरी कवायद का असर जमीन पर यह होगा कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले परिवारों को डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। खासकर जनजातीय इलाकों में जहां सड़क और बिजली के बाद अब इंटरनेट की पहुंच ही विकास की नई कड़ी बनने जा रही है। मुख्य सचिव की मंशा भी यही थी कि तकनीकी बाधाओं की वजह से कोई भी नागरिक योजनाओं के दायरे से बाहर न रह जाए।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: बैठक किसकी अध्यक्षता में हुई?
जवाब: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक हुई।
सवाल: किन जिलों के सीमावर्ती गांव प्राथमिकता पर हैं?
जवाब: बाड़मेर और श्रीगंगानगर सहित सीमावर्ती जिलों के अनकवर्ड गांवों को प्राथमिकता से जोड़ा जाएगा, जबकि टावर के लिए भूमि आवंटन उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में तेज किया जा रहा है।
सवाल: राइट ऑफ वे नियम-2024 कब से प्रभावी है और कब तक अंगीकृत करना है?
जवाब: नियम 1 जनवरी 2025 से प्रभावी है और सभी नगरीय निकायों, निगमों व सार्वजनिक उपक्रमों को इसे 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अंगीकृत करना है।
सवाल: प्रोत्साहन राशि कितनी है?
जवाब: विशेष सहायता योजना के तहत राज्य को ₹150 करोड़ की पूरी प्रोत्साहन राशि मिलनी है।
निष्कर्ष
राजस्थान की यह पहल सिर्फ टावर लगाने का प्रशासनिक काम नहीं है, बल्कि सरहद के अंतिम छोर पर बैठे परिवार को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश है। राइट ऑफ वे नियम-2024 को समय पर लागू करना, भारतनेट को गति देना और 4G सेचुरेशन को सीमावर्ती जिलों में प्राथमिकता देना – तीनों दिशाएं मिलकर डिजिटल इंडिया की जमीनी तस्वीर बदल सकती हैं। अब देखने वाली बात यह है कि 30 सितंबर की समयसीमा तक निकायों से अंगीकृत आंकड़े कितने जल्दी अपेक्षित नतीजे देते हैं।
स्रोत: dbn.gov.in | BSNL
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