बड़ा न्यायिक फेरबदल: संजय के. अग्रवाल राजस्थान हाईकोर्ट के सीजे, पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कमान

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बड़ा न्यायिक फेरबदल: संजय के. अग्रवाल राजस्थान हाईकोर्ट के सीजे, पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कमान
हरावल

न्यायपालिका में इस सप्ताहांत ऐसा फेरबदल हुआ जो राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था के लिए किसी संकट से उबरने जैसा है। करीब 10 महीने तक बिना नियमित मुख्य न्यायाधीश के चले राजस्थान हाईकोर्ट को अब अपना पूर्णकालिक प्रमुख मिल गया है। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की है। वहीं, इसी फेरबदल में राजस्थान हाईकोर्ट के ही न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को पदोन्नत कर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।

यह नियुक्ति सिर्फ एक रोटेशन नहीं है – इसकी एक गहरी पृष्ठभूमि है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक जज के खुलासे, एक्टिंग चीफ जस्टिस पर लगे गंभीर आरोप और वकीलों के विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। यानी जहां एक तरफ यह ताज की नियुक्ति है, वहीं यह संस्थागत सवालों के बीच आई एक बड़ी राहत भी।

10 महीने बाद नियमित सीजे की वापसी

राजस्थान हाईकोर्ट पिछले करीब एक साल से नियमित मुख्य न्यायाधीश के बिना काम कर रहा था। सितंबर 2025 से जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा कार्यवाहक (एक्टिंग) मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अदालत की कमान संभाल रहे थे। अब जस्टिस अग्रवाल की नियुक्ति के साथ यह लंबा इंतजार खत्म होता दिख रहा है – क्योंकि यह पहली बार है जब करीब 10 महीने के बाद इस अदालत को कोई पूर्णकालिक प्रमुख मिला है।

समय-रेखा साफ कर देती है कि यह प्रक्रिया कब-कब आगे बढ़ी:

तारीखघटनाक्रम
31 अगस्त 2026सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने संजय के. अग्रवाल की राजस्थान HC सीजे के तौर पर सिफारिश की
4 सितंबर 2026छत्तीसगढ़ HC के सीजे रमेश सिन्हा सेवानिवृत्त; अग्रवाल ने वहां कार्यवाहक सीजे की जिम्मेदारी संभाली
सप्ताहांत (5-6 सितंबर)राष्ट्रपति भवन/केंद्र की ओर से आठ हाईकोर्ट के नए सीजे की नियुक्ति अधिसूचना जारी

कौन हैं जस्टिस संजय के. अग्रवाल?

जस्टिस संजय के. अग्रवाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश थे, जिन्हें अब राजस्थान हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। उनका न्यायिक सफर दो दशक पुराना है:

  • 16 सितंबर 2013 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने
  • 8 मार्च 2016 को स्थायी (परमानेंट) न्यायाधीश नियुक्त हुए
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सीजे रमेश सिन्हा के 4 सितंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद वहां कार्यवाहक सीजे की जिम्मेदारी निभाई
  • 15 जुलाई 2027 को उनकी सेवानिवृत्ति निर्धारित है

एक दिलचस्प तकनीकी पहलू यह भी है कि कोलेजियम ने उनके लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव पारित किए – एक में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई और दूसरे में उन्हें वहां का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की। कारण यह समझा जाता है कि किसी जज के स्थानांतरण में राज्य सरकार की राय नहीं लेनी होती, इसलिए यह रास्ता तेज होता है, जबकि मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राज्य सरकार की राय भी ली जाती है। स्थानांतरण की अधिसूचना जारी होते ही अग्रवाल राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जज बन जाएंगे और नियमित सीजे की नियुक्ति प्रभावी होने तक कार्यवाहक प्रमुख के तौर पर काम करेंगे।

राजस्थान से जम्मू-कश्मीर: पुष्पेंद्र सिंह भाटी की नई पारी

इस फेरबदल की दूसरी बड़ी खबर जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की पदोन्नति है। वे राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत थे और अब उन्हें जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। उनकी नियुक्ति भी कोलेजियम की 31 अगस्त की सिफारिश के बाद इसी सप्ताहांत अधिसूचित हुई।

उनका करियर भी स्पष्ट मील के पत्थर दर्ज करता है:

  • 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने
  • 16 मार्च 2018 को स्थायी न्यायाधीश की पुष्टि हुई
  • 20 सितंबर 2032 तक उनकी सेवानिवृत्ति तय है (यदि सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति न हो)

एक साथ आठ हाईकोर्ट में नई कमान

यह फेरबदल सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा। केंद्र ने शनिवार की रात एक साथ आठ हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति अधिसूचित की:

हाईकोर्टनए मुख्य न्यायाधीश
राजस्थानजस्टिस संजय कुमार अग्रवाल
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाखजस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी
मध्य प्रदेशजस्टिस आल्पेश यशवंत कोगजे (गुजरात HC से)
छत्तीसगढ़जस्टिस कृष्ण राम मोहापात्रा (ओडिशा HC से)
पटनाजस्टिस वी. कामेश्वर राव
कलकत्ताजस्टिस रवींद्र वी. घुगे
बॉम्बेजस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी
पंजाब एवं हरियाणाजस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा

यानी एक ही सप्ताहांत में उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक देश के आठ उच्च न्यायालयों की कमान नए हाथों में सौंपी गई – जो न्यायिक नेतृत्व के कायाकल्प की एक दुर्लभ तस्वीर है।

विवाद की जड़: एक्टिंग सीजे पर गंभीर आरोप

इस नियुक्ति की असली कहानी वहां छिपी है जहां से विवाद शुरू हुआ था। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने मुख्य न्यायाधीश को तीन पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। ये पत्र 2, 10 और 17 अगस्त को लिखे गए थे।

पत्रों में क्या-क्या कहा गया:

  • भ्रष्टाचार (करप्शन) के आरोप
  • भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) और तरफदारी
  • प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप
  • मामलों की सुनवाई की सूची (लिस्टिंग) में हेरफेर करने का आरोप
  • न्यायिक अधिकारियों को धमकाने का आरोप

जस्टिस मेहता ने यह भी कहा था कि शर्मा को राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने की उनकी अपीलों का कोई जवाब नहीं मिला और राजस्थान हाईकोर्ट के लिए किसी दूसरे उच्च न्यायालय से नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की थी। पत्र सार्वजनिक होते ही मामला गरमा गया – वकीलों ने प्रदर्शन किया और मुख्य न्यायाधीश को संस्थागत कार्रवाई का आश्वासन देना पड़ा।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने उसी दिन प्रेस स्टेटमेंट जारी कर कहा था कि इन आरोपों पर संस्थागत तंत्र के जरिए विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, जस्टिस शर्मा ने आरोपों को ‘आधारहीन और तथ्यहीन’ बताते हुए सबूतों के साथ विस्तृत जवाब मुख्य न्यायाधीश को सौंपा है। वे इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसलिए उनके स्थानांतरण का सवाल अब कम प्रासंगिक हो चुका है – लेकिन आरोपों की संस्थागत जांच अभी लंबित है।

कोलेजियम से राष्ट्रपति तक: नियुक्ति का पूरा सफर

कई पाठकों के मन में सवाल है कि हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश आखिर नियुक्त होता कैसे है। सरल भाषा में समझिए:

  1. कोलेजियम की सिफारिश – सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की बैठक (कोलेजियम) तय करती है कि किस जज को किस हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाए। इस मामले में कोलेजियम में सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना शामिल थे।
  2. सरकार की मंजूरी – सिफारिश केंद्र सरकार को जाती है, जहां राज्य सरकार की राय लेकर अंतिम प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास पहुंचता है।
  3. नियुक्ति अधिसूचना – राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कार्मिक मंत्रालय/राष्ट्रपति भवन की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होती है। यहीं से नियुक्ति कानूनी रूप से प्रभावी होती है।

इस मामले में कोलेजियम ने 31 अगस्त को सिफारिश की थी और महज पांच दिनों के भीतर ही नियुक्ति अधिसूचना जारी कर दी गई – जो न्यायिक नियुक्तियों के लिहाज से असामान्य रूप से तेज प्रक्रिया है।

रिक्तियों का संकट: 50 में से 32 ही कार्यरत

नए मुख्य न्यायाधीश के सामने एक बड़ी चुनौती पहले से ही मौजूद है – न्यायाधीशों की भारी कमी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट की स्वीकृत संख्या 50 न्यायाधीशों की है, जबकि वर्तमान में केवल 32 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं – यानी 18 पद रिक्त हैं।

यह सिर्फ राजस्थान की समस्या नहीं है। देशभर के उच्च न्यायालयों में सैकड़ों रिक्तियां हैं और देश के 25 हाईकोर्ट में से केवल तीन ही पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। ऐसे में नए सीजे की पहली प्राथमिकता में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज करना भी शामिल होगा, ताकि लंबित मामलों का बोझ घट सके।

आगे की चुनौतियां

जस्टिस अग्रवाल के सामने तीन बड़े काम होंगे:

पहला – राजस्थान हाईकोर्ट में भरोसे की बहाली। एक्टिंग सीजे पर लगे आरोपों, प्रदर्शनों और आंतरिक खींचतान के बाद अदालत के माहौल को सामान्य करना सबसे जरूरी है।

दूसरा – रिक्त पदों को भरना। 18 रिक्तियों के साथ अदालत का कामकाज दबाव में है, और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संस्थागत जरूरत है।

तीसरा – सुप्रीम कोर्ट से तालमेल। संदीप मेहता के पत्रों से जुड़ी संस्थागत कार्यवाही अभी जारी है, और नए सीजे को न्यायपालिका की छवि साफ रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।


FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह सिर्फ कोलेजियम की सिफारिश है या अंतिम नियुक्ति?
यह अंतिम नियुक्ति है। कोलेजियम ने 31 अगस्त को सिफारिश की थी, जिसके बाद सप्ताहांत में राष्ट्रपति भवन/केंद्र की ओर से नियुक्ति आदेश जारी हो गए। सिफारिश और नियुक्ति – दोनों चरण पूरे हो चुके हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट को नियमित सीजे कब से नहीं मिला था?
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा सितंबर 2025 से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे थे, यानी करीब 10 महीने से अदालत बिना नियमित प्रमुख के चल रही थी।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की नई जिम्मेदारी क्या है?
जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी राजस्थान हाईकोर्ट से पदोन्नत होकर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए हैं।

एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा पर क्या कार्रवाई हुई?
जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के बाद सीजेआई ने संस्थागत तंत्र से जांच का आश्वासन दिया है। शर्मा ने आरोपों का खंडन करते हुए सबूतों सहित जवाब दिया है, और यह मामला कोलेजियम/सीजेआई के विचाराधीन है। वे इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

निष्कर्ष

राजस्थान हाईकोर्ट की नई कमान कोई साधारण प्रशासनिक बदलाव नहीं है। यह एक ऐसी नियुक्ति है जो विवाद के बाद आई राहत, एक लंबे इंतजार का अंत और न्यायपालिका के आंतरिक तंत्र की एक बड़ी परीक्षा है। जस्टिस संजय अग्रवाल के पास मजबूत न्यायिक अनुभव है, लेकिन उनके सामने वह अदालत है जिसे भरोसे के संकट से उबारना है – और जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के पास जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य की न्यायिक कमान संभालने का अवसर है। आने वाले महीने तय करेंगे कि यह फेरबदल न्यायपालिका के भरोसे को कितना मजबूत करता है।

स्रोत तालिका: द लीफलेट | ईटी लीगल | लाइव लॉ |

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