राजस्थान के किसानों और युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक पल – राज्य का पहला सरकारी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग सेंटर बीकानेर के प्रतिष्ठित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में शुरू हो गया है। यह DGCA अधिकृत मिडिल क्लास रोटरक्राफ्ट ट्रेनिंग सेंटर न केवल कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देगा, बल्कि राज्य के हज़ारों युवाओं को एक नई, उच्च-तकनीकी करियर पथ भी खोलेगा। कृषि, सर्वेक्षण, मैपिंग और भू-स्थानिक डेटा संग्रह जैसे क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है, और अब राजस्थान के युवा इस क्रांति का हिस्सा बनकर अपनी आजीविका सुधार सकेंगे। राज्य सरकार की इस पहल को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक यह सुविधा केवल निजी संस्थानों तक सीमित थी और प्रशिक्षण शुल्क भी काफ़ी अधिक था। पहली बार एक सरकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से यह प्रशिक्षण सस्ती दर पर और बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो रहा है।
क्या है ड्रोन पायलट ट्रेनिंग सेंटर?
यह सेंटर मूलतः एक Remote Pilot Training Organization (RPTO) है, जिसे भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से आधिकारिक अनुमति प्राप्त है। यहां प्रशिक्षण 5 से 7 दिनों का एक सघन कार्यक्रम होगा, जिसमें प्रतिभागियों को ड्रोन संचालन के व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों पहलुओं की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रतिभागियों को Remote Pilot Certificate (RPC) प्रदान किया जाता है, जो ड्रोन पायलट के रूप में व्यावसायिक रूप से काम करने के लिए अनिवार्य है।
प्रशिक्षण में ये प्रमुख विषय शामिल हैं:
- ड्रोन उड्डयन नियमावली और सुरक्षा मानक
- फ्लाइट प्लानिंग और मौसम विश्लेषण
- ड्रोन संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण
- कृषि, सर्वेक्षण और मैपिंग के लिए ड्रोन अनुप्रयोग
- डेटा प्रोसेसिंग और रिपोर्ट जनरेशन
प्रशिक्षण श्रेणी – मीडियम क्लास रोटरक्राफ्ट (Multirotor) – है, जो कृषि छिड़काव, भूमि सर्वेक्षण और मैपिंग जैसे कार्यों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है।
कैसे हुई शुरुआत – भागीदारी और MoU
इस ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना में तीन प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रही है – स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU), भारत ड्रोन्स और PBC’s एयरो हब। तीनों ने मिलकर एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत SKRAU में RPTO स्थापित किया गया है। यह मॉडल काफ़ी रोचक है क्योंकि इसमें एक सरकारी कृषि विश्वविद्यालय, एक तकनीकी विशेषज्ञ और एक निजी एयरोनॉटिक्स संस्थान एक साथ काम कर रहे हैं।
इससे दो बड़े फ़ायदे मिल रहे हैं – पहला, छात्रों को सरकारी मान्यता प्राप्त डिग्री और साथ ही DGCA प्रमाणित पायलट सर्टिफिकेशन दोनों मिल सकेंगे। दूसरा, बाज़ार में उपलब्ध महंगे प्रशिक्षण की तुलना में यहां प्रशिक्षण लागत काफ़ी कम होगी।
स्कॉलरशिप और रोजगार के अवसर
इस पहल की सबसे आकर्षक बात यह है कि यहां ₹10 लाख की स्कॉलरशिप फंड भी स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के प्रतिभागियों को ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग प्राप्त करने में मदद करना है। यह स्कॉलरशिप उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगी जो इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन प्रशिक्षण की उच्च लागत के कारण पीछे रह जाते हैं।
रोजगार की संभावनाएं:
- कृषि क्षेत्र में ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव, फसल निगरानी और मिट्टी विश्लेषण
- रियल एस्टेट और भूमि सर्वेक्षण में ड्रोन मैपिंग
- सरकारी विभागों में सर्वे और निगरानी कार्य
- डिज़ास्टर मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन
- फ़िल्म, फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफ़ी
- ड्रोन स्टार्टअप और व्यक्तिगत व्यावसायिक ड्रोन सेवाएं
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार कृषि, निर्माण, सर्वेक्षण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में ड्रोन पायलट की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। अगले 3-5 वर्षों में यह एक लाख से अधिक नई नौकरियां पैदा करने वाला सेक्टर बन सकता है।
कृषि क्षेत्र में ड्रोन के अद्भुत उपयोग
राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां अधिकांश किसान सूखे और अर्द्ध-सूखे क्षेत्रों में खेती करते हैं। ऐसे में ड्रोन तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है।
कृषि में ड्रोन के प्रमुख उपयोग:
- कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव: ड्रोन से एक एकड़ खेत में छिड़काव केवल 5-7 मिनट में हो जाता है, जबकि पारंपरिक तरीके में 1-2 घंटे लगते हैं। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों बचते हैं।
- फसल स्वास्थ्य निगरानी: मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरे से लैस ड्रोन फसलों की सेहत का आकलन कर सकते हैं। रोगग्रस्त क्षेत्रों की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे समय रहते उपचार संभव हो जाता है।
- मिट्टी और सिंचाई विश्लेषण: ड्रोन से मिट्टी की नमी, उर्वरता और जल निकासी का सटीक आकलन होता है, जिससे सिंचाई और उर्वरण की योजना अधिक सटीक बनती है।
- फसल बीमा और नुकसान आकलन: ड्रोन डेटा से फसल बीमा कंपनियों को सटीक नुकसान का आकलन करने में मदद मिलती है।
- बीज बुवाई: नए ड्रोन मॉडल बीजों की सटीक बुवाई भी कर सकते हैं, खासकर पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में।
बीकानेर क्यों चुना गया – रणनीतिक महत्व
बीकानेर का चयन रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र मुख्यतः मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय भूभाग वाला है, जहां पारंपरिक कृषि चुनौतीपूर्ण है। यहां के किसान बाजरा, ज्वार, मोठ, ग्वार और चंवला जैसी फसलें उगाते हैं। ड्रोन तकनीक इन किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है क्योंकि –
- बड़े कृषि भूभाग की निगरानी आसान होगी
- पानी की कमी वाले क्षेत्रों में सटीक सिंचाई संभव होगी
- कीट और रोग प्रबंधन समय रहते हो सकेगा
- किसानों की आय बढ़ेगी और उत्पादन लागत घटेगी
साथ ही, बीकानेर में SKRAU का अपना विशाल कृषि फार्म, प्रयोगशाला और प्रशिक्षण स्टाफ उपलब्ध है, जिससे ड्रोन पायलट को फील्ड ट्रेनिंग भी उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ मिल सकेगी।
कैसे करें आवेदन – प्रक्रिया
इस सेंटर में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अलावा, अभ्यर्थी को भारत का नागरिक होना चाहिए और DGCA द्वारा निर्धारित चिकित्सकीय मानकों को पूरा करना होगा।
आवेदन की प्रक्रिया:
- SKRAU बीकानेर की आधिकारिक वेबसाइट (raubikaner.org) पर जाकर RPTO सेक्शन में रजिस्ट्रेशन करें।
- निर्धारित शुल्क जमा करें (सामान्यतः ₹40,000-₹60,000 के बीच, हालांकि स्कॉलरशिप से यह काफ़ी कम हो सकता है)।
- 5-7 दिन का प्रशिक्षण सत्र पूरा करें।
- DGCA की परीक्षा उत्तीर्ण करें और Remote Pilot Certificate प्राप्त करें।
आधिकारिक संपर्क:
- ईमेल: krau.rpto@gmail.com
- संपर्क: +91 8890708677
भविष्य की दिशा – राजस्थान बनेगा ड्रोन हब?
बीकानेर में शुरू हुआ यह ट्रेनिंग सेंटर राजस्थान को भारत के ड्रोन मैप पर एक नई पहचान दिलाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल अन्य जिलों में भी विस्तारित होगी। आने वाले कुछ वर्षों में यहां के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ड्रोन प्रौद्योगिकी में अपनी पहचान बना सकेंगे।
केंद्र सरकार भी ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ‘ड्रोन शक्ति’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं चला रही है। ऐसे में राजस्थान का यह कदम सही दिशा में उठाया गया एक रणनीतिक निर्णय है।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. बीकानेर का ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर किस विश्वविद्यालय में शुरू हुआ है?
यह सेंटर स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU), बीकानेर में DGCA अधिकृत RPTO के रूप में शुरू हुआ है।
Q2. ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग कितने दिनों की होती है?
DGCA के मानकों के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 से 7 दिनों का होता है। इसके बाद प्रमाणन के लिए अलग से परीक्षा होती है।
Q3. क्या कोई स्कॉलरशिप भी मिलती है?
हां, ₹10 लाख का स्कॉलरशिप फंड स्थापित किया गया है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं को प्रशिक्षण में सहायता प्रदान करता है।
Q4. प्रशिक्षण की फीस कितनी है?
निजी संस्थानों में सामान्यतः ₹40,000 से अधिक फीस होती है। SKRAU में सरकारी फंड और स्कॉलरशिप के कारण यह काफ़ी कम हो सकती है।
Q5. ट्रेनिंग के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है?
अभ्यर्थी की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और उसे DGCA द्वारा निर्धारित चिकित्सकीय मानक पूरे करने होंगे।
Q6. ड्रोन पायलट बनकर कौन-से क्षेत्रों में काम मिल सकता है?
कृषि, भूमि सर्वेक्षण, रियल एस्टेट मैपिंग, आपदा प्रबंधन, फ़िल्म और फ़ोटोग्राफ़ी, ई-कॉमर्स डिलीवरी जैसे कई क्षेत्रों में ड्रोन पायलट की मांग बढ़ रही है।
निष्कर्ष
बीकानेर में SKRAU के माध्यम से राजस्थान का पहला सरकारी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग सेंटर केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं है – यह राज्य के कृषि भविष्य और युवा रोज़गार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जब किसान ड्रोन की मदद से अपनी फ़सलों की सटीक निगरानी कर सकेंगे और युवा ड्रोन पायलट बनकर अपनी आजीविका सुधार सकेंगे, तब राजस्थान सच्चे अर्थों में एक ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर स्टेट’ बनकर उभरेगा। सरकारी समर्थन, स्कॉलरशिप, सस्ती ट्रेनिंग और बढ़ती मांग – ये सभी तत्व मिलकर इस क्षेत्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। अब देखना यह है कि कितने युवा इस अवसर का लाभ उठाकर राजस्थान का नाम ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में ऊंचा करते हैं।
Reference:
- SKRAU आधिकारिक वेबसाइट – https://raubikaner.org
- DGCA – https://www.dgca.gov.in
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