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Saturday, July 25, 2026
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राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त अल्टीमेटम: 20 जुलाई को चुनाव शेड्यूल लेकर पहुंचे आयोग, OBC रिपोर्ट पर 7 दिन की डेडलाइन

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपना लिया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित विभागों को 20 जुलाई को चुनाव कार्यक्रम के साथ पेश होने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती, 20 जुलाई को चुनाव शेड्यूल पेश करने का आदेश

राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और स्थानीय निकाय विभाग को 20 जुलाई को चुनाव शेड्यूल के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 7 दिन में प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि अदालत अब इस मामले में और देरी के पक्ष में नहीं है।

अदालत ने लगातार दूसरे दिन हुई सुनवाई में राज्य सरकार के साथ-साथ राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा केंद्र में रहा कि जब चुनाव संबंधी समय-सीमा पहले से स्पष्ट थी, तब चुनाव कार्यक्रम जारी करने के बजाय अतिरिक्त समय मांगने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त से कोर्ट के तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह से अदालत ने पूछा कि चुनाव कराने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय मांगने वाला पत्र किस आधार पर लिखा गया। इस पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अदालत को बताया कि यह पत्र राज्य सरकार के कहने पर लिखा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर चुनाव कराने के लिए आयोग की ओर से सरकार को कई बार पत्र भेजे गए थे।

खंडपीठ ने इस दौरान कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए यह भी संकेत दिया कि अवमानना याचिका पहले से लंबित है और अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है। इससे यह स्पष्ट है कि न्यायालय केवल औपचारिक स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं, बल्कि ठोस चुनावी रोडमैप चाहता है।

OBC आरक्षण और ‘ट्रिपल टेस्ट’ बना देरी का केंद्र

राज्य सरकार ने अदालत में दायर अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। सरकार के अनुसार राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगा, जबकि 31 अगस्त तक आरक्षण का अंतिम विवरण तैयार हो सकेगा। इसके बाद पंचायत चुनाव चार चरणों में और निकाय चुनाव दो चरणों में कराने के लिए लगभग 90 दिन की जरूरत बताई गई है।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को तत्काल राहत का आधार नहीं माना। अदालत ने साफ कर दिया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 14 अगस्त तक प्रतीक्षा करने के बजाय 7 दिन में पेश की जाए। यह आदेश संकेत देता है कि अदालत चुनावी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक खिंचने देने के मूड में नहीं है।

अवमानना याचिका ने बढ़ाया दबाव

इस पूरे मामले में विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका भी विचाराधीन है। अदालत ने पहले भी अपने आदेशों के पालन में देरी को गंभीर माना था, और अब लगातार दो दिनों की सख्त सुनवाई ने सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर दबाव और बढ़ा दिया है।

20 जुलाई अब क्यों है निर्णायक तारीख

20 जुलाई की अगली सुनवाई अब इस पूरे विवाद का निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। उस दिन अदालत केवल स्थिति रिपोर्ट नहीं, बल्कि चुनाव कार्यक्रम के साथ ठोस प्रशासनिक तैयारी देखना चाहती है। यदि संबंधित विभाग स्पष्ट शेड्यूल के साथ अदालत के सामने नहीं आते, तो न्यायिक सख्ती और बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर अब कानूनी और राजनीतिक दोनों दबाव तेज हो गए हैं। हाईकोर्ट का ताजा रुख यह बताता है कि चुनावी देरी को अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के नाम पर नहीं टाला जा सकेगा। राज्य निर्वाचन आयोग, सरकार और ओबीसी आयोग – तीनों पर अब समयबद्ध जवाबदेही तय होती दिखाई दे रही है।

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