जयपुर। राजस्थान की राजनीति का केंद्र इस बार विधानसभा की गैलरियों से खिसककर गांव की चौपाल और शहर के वार्ड तक पहुंच गया है। आने वाले सौ दिन तय करेंगे कि प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की जड़ें ज़मीन पर वाकई कितनी गहरी हैं, और विपक्ष में बैठी कांग्रेस के पास खोई हुई ज़मीन वापस पाने का कोई नक्शा बचा है या नहीं।
यह महज़ एक स्थानीय चुनाव नहीं है। आंकड़ों की भाषा में देखें तो यह लोकसभा और विधानसभा के बाद प्रदेश का तीसरा नहीं, बल्कि सबसे विशाल मतदान अभ्यास है – जहां पंचायती राज और नगरीय निकाय मिलाकर साढ़े पांच करोड़ से अधिक मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। और इस बार खास बात यह है कि आज़ादी के बाद पहली बार राजस्थान इन दोनों चुनावों को ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की तर्ज पर एक ही चुनावी खिड़की में समेटने जा रहा है।
जयपुर की बैठक का असली संदेश
बीते शनिवार जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में जो हुआ, वह रुटीन संगठनात्मक बैठक नहीं थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार की मौजूदगी में ‘नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनाव संचालन समिति’ की बैठक दरअसल पार्टी के चुनावी इंजन को औपचारिक रूप से स्टार्ट करने का ऐलान थी।
बैठक के भीतर की चर्चा जिन बिंदुओं पर केंद्रित रही, वे भाजपा की क्लासिक कार्यशैली की तस्वीर खींचते हैं – बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों का बंटवारा, क्षेत्रवार अलग-अलग रणनीति और चुनाव संचालन का सूक्ष्म ढांचा। राठौड़ का यह दावा कि “पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में है और संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय है” – असल में विपक्ष के लिए एक संदेश भी है और अपने कार्यकर्ताओं के लिए बिगुल भी।
पर इस बैठक की सबसे बड़ी राजनीतिक लाइन कहीं और थी। प्रदेशाध्यक्ष ने याद दिलाया कि हालिया उपचुनावों में पार्टी ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर परचम लहराया – और इसमें भी सबसे नुकीला तीर यह रहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के अपने विधानसभा क्षेत्र में हुए पंचायत समिति उपचुनाव में भी भाजपा ने बाज़ी मार ली। राजनीति में प्रतीक कई बार आंकड़ों से बड़े होते हैं, और यह ठीक वैसा ही प्रतीक है जिसे भाजपा आने वाले हफ्तों में हर मंच से दोहराएगी।
विपक्ष पर वार: “जनता के मुद्दे नहीं, आपसी होड़”
मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर जो हमला बोला, उसका निशाना नीतिगत नहीं, मनोवैज्ञानिक था। उनका आरोप था कि विपक्ष सरकार की उपलब्धियों पर बहस करने के बजाय आंतरिक खींचतान में उलझा है, जहां नेता एक-दूसरे को पीछे छोड़ने और आलाकमान का ध्यान खींचने की होड़ में लगे हैं।
इसे भी पढ़ें - राजस्थान कांग्रेस में फिर सियासी घमासान, डोटासरा के बयान पर गहलोत खेमे का पलटवार
राजनीतिक रूप से यह एक सधी हुई चाल है। स्थानीय चुनावों में जहां मुद्दे सड़क, नाली, पानी और पट्टे जैसे बेहद ठोस होते हैं, वहां विपक्ष को ‘बिखरा हुआ’ साबित कर देना आधी लड़ाई जीत लेने जैसा है। कांग्रेस के सामने चुनौती दोहरी है – पहले अपने भीतर के सुरों को एक करना, फिर मैदान में उतरना।
तारीखों का पूरा नक्शा: कब क्या होगा
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से हाईकोर्ट में प्रस्तुत प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार तस्वीर काफी हद तक साफ है (औपचारिक घोषणा के समय इनमें मामूली बदलाव संभव है):
| चरण | नगरीय निकाय चुनाव | पंचायती राज चुनाव |
|---|---|---|
| घोषणा | 17 अगस्त 2026 | 23 सितंबर 2026 |
| मतदान | 6 और 9 सितंबर (2 चरण) | 13 अक्टूबर से 5 नवंबर (4 चरण) |
| परिणाम | 11 सितंबर | 12 नवंबर तक |
| अंतिम डेडलाइन | — | 15 नवंबर 2026 (हाईकोर्ट निर्देश) |
इस पूरी टाइमलाइन की धुरी एक ही बिंदु पर टिकी है – ओबीसी आरक्षण। ओबीसी आयोग को अपनी अंतिम राजनीतिक आरक्षण रिपोर्ट 5 अगस्त तक सौंपनी है। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग को 15 अगस्त तक आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी करनी है। यानी आने वाले दो हफ्ते ही तय करेंगे कि हजारों सरपंच, पार्षद और प्रधान पद किस वर्ग के खाते में जाएंगे – और यही वह क्षण है जब हजारों संभावित दावेदारों की किस्मत लॉटरी की पर्ची से लिखी जाएगी।
आंकड़ों में समझिए इस चुनाव की विशालता
यह चुनाव कितना बड़ा है, इसका अंदाज़ा प्रशासनिक तैयारियों से लगाइए:
पंचायती राज चुनाव
- 14,403 ग्राम पंचायतें, 457 पंचायत समितियां, 41 जिला परिषदें
- 45,316 मतदान केंद्र
- लगभग 4.02 करोड़ मतदाता
- प्रत्यक्ष चुनाव चार पदों पर – वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य
- अप्रत्यक्ष चुनाव – उपसरपंच, प्रधान, उप प्रधान, जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख
- एक चरण के लिए ही 80,000 कर्मचारी और 70,000 पुलिसकर्मी
नगरीय निकाय चुनाव
- 309 निकाय, 10,245 वार्ड
- 16,482 मतदान केंद्र
- लगभग 1.43 करोड़ मतदाता
- प्रत्यक्ष चुनाव केवल सदस्य पद के लिए; अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव बाद में
- एक चरण के लिए 60,000 कर्मचारी और 50,000 पुलिसकर्मी
यही कारण है कि निकाय चुनाव दो और पंचायत चुनाव चार चरणों में प्रस्तावित हैं – प्रदेश के पास एक साथ इतना मानव संसाधन तैनात करने की क्षमता ही नहीं है।
निर्वाचन आयोग का सख्त रुख: फर्जी मतदान पर शिकंजा
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पहचान सत्यापन को लेकर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है। सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मतदान के समय फोटोयुक्त पहचान पत्र या आयोग द्वारा मान्य वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। स्थानीय चुनावों में जहां जीत-हार अक्सर दो-चार वोटों से तय होती है, वहां यह कदम व्यावहारिक रूप से बेहद अहम है।
असली दांव क्या है?
सतह पर यह सरपंच और पार्षद चुनने की कवायद दिखती है। पर राजस्थान की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि पंचायत और निकाय चुनाव प्रदेश का असली ‘पावर ग्रिड’ तैयार करते हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति का ढांचा ही वह मंच है जहां से अगली पीढ़ी के विधायक और सांसद निकलते हैं। ग्रामीण विकास के बजट का वितरण, स्थानीय ठेके, योजनाओं का क्रियान्वयन – सब कुछ इसी नेटवर्क से गुजरता है।
भजनलाल शर्मा सरकार के लिए यह पहला ऐसा व्यापक जनादेश परीक्षण है जो सीधे उसके ढाई साल के कामकाज पर मुहर या सवाल लगाएगा। भाजपा के पास संगठन की मशीनरी और सत्ता का लाभ दोनों हैं। कांग्रेस के पास खोने को कम और पाने को ज्यादा है – बशर्ते वह समय रहते अपनी सफ़ें दुरुस्त कर ले।
एक तीसरा कोण भी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता – स्थानीय चुनावों में पार्टी सिंबल से ज़्यादा जाति समीकरण, गांव की गुटबाज़ी और व्यक्तिगत साख चलती है। यहां निर्दलीय और बागी अक्सर बड़े दलों का पूरा गणित बिगाड़ देते हैं। यही वह अनिश्चितता है जो इस चुनाव को दिलचस्प बनाती है।
आगे की राह
अगले 15 दिन प्रशासनिक दृष्टि से सबसे निर्णायक हैं – ओबीसी रिपोर्ट, आरक्षण लॉटरी और फिर 17 अगस्त को निकाय चुनाव की औपचारिक घोषणा। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू होगी और प्रदेश की राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में रंग जाएगी।
राजस्थान के गांव-कस्बे अगले सौ दिन तक तय करेंगे कि प्रदेश की राजनीतिक हवा किस दिशा में बह रही है। और यह फैसला जयपुर के किसी दफ्तर में नहीं, बल्कि 45 हज़ार से ज़्यादा मतदान केंद्रों की कतारों में लिखा जाएगा।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ?
Q. राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे?
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पंचायत चुनाव की घोषणा 23 सितंबर 2026 को होगी और 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच चार चरणों में मतदान होगा। परिणाम 12 नवंबर तक घोषित होंगे।
Q. निकाय चुनाव की तारीख क्या है?
नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा 17 अगस्त 2026 को प्रस्तावित है। मतदान 6 और 9 सितंबर को तथा परिणाम 11 सितंबर को आएंगे।
Q. चुनाव में देरी की वजह क्या रही?
ओबीसी राजनीतिक आरक्षण की रिपोर्ट और परिसीमन प्रक्रिया के कारण चुनाव टलते रहे। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब 15 नवंबर 2026 की अंतिम समयसीमा तय हुई है।
Q. कितने पदों पर सीधा मतदान होगा?
पंचायत में चार पदों – वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पर, जबकि निकाय में केवल वार्ड सदस्य पद पर सीधा मतदान होगा।
स्रोत: State Election Commission, Rajasthan
इसे भी पढ़ें –
[…] […]
[…] […]
[…] […]