पाली में आयोजित कार्यक्रम में इतिहासविद राजवीर सिंह चलकोई ने राजस्थानी भाषा को प्रदेश की अस्मिता, संस्कृति और गौरव का प्रतीक बताते हुए संवैधानिक मान्यता की मांग उठाई। मातृभाषा के सम्मान, सांस्कृतिक विरासत और युवा भागीदारी पर केंद्रित यह बहस अब नए सिरे से तेज होती दिख रही है।