राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की राजनीतिक जंग आखिरकार अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रदेश की 309 नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव के पहले चरण में बुधवार (9 सितंबर) को 162 निकायों के लिए मतदान होगा। सुबह 7 बजे से शुरू होने वाले इस मतदान में चार नगर निगम, दो दर्जन से ज्यादा नगर परिषदें और सैकड़ों नगर पालिकाएं शामिल हैं। लेकिन यह चुनाव सिर्फ पार्षदों और अध्यक्षों का चुनाव नहीं है – इस चुनावी रण में भाजपा और कांग्रेस के 105 दिग्गज नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी सीधे दांव पर लगी है। नतीजे जो भी हों, वे आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
हाइलाइट्स
- कब: बुधवार, 9 सितंबर 2026, सुबह 7 बजे से मतदान शुरू
- कितने निकाय: पहले चरण में 162 नगरीय निकाय – 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद, 134 नगर पालिका
- कुल तस्वीर: प्रदेश की 309 निकायों में दो चरणों में वोटिंग, 10,245 पार्षद पदों का चुनाव
- मतदाता: करीब 1.44 करोड़ वोटर तय करेंगे नतीजे
- दांव पर: भाजपा-कांग्रेस के 105 दिग्गज नेताओं की सियासी प्रतिष्ठा
- अगला चरण: दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर, मतगणना 14 सितंबर को
- पृष्ठभूमि: राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव 15 नवंबर से पहले कराने का आदेश दिया था
- आयोग का संदेश: निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से निडर होकर वोट डालने की अपील की
पहले चरण का पूरा नक्शा: किन निकायों में होगी वोटिंग?
पहले चरण का मतदान राज्य के चारों ओर फैले निकायों के लिए होगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 9 सितंबर की वोटिंग में चार नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाएं शामिल हैं – कुल मिलाकर 162 निकाय।
| निकाय का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| नगर निगम | 4 |
| नगर परिषद | 24 |
| नगर पालिका | 134 |
| कुल (पहला चरण) | 162 |
दो चरणों में 309 निकायों का चुनाव: पूरा शेड्यूल
राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरे चुनावी कार्यक्रम की घोषणा पहले ही कर दी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में दो चरणों में मतदान होगा – 9 और 11 सितंबर – जबकि सभी निकायों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
| चरण | तारीख | विवरण |
|---|---|---|
| पहला चरण | बुधवार, 9 सितंबर 2026 | 162 निकायों में मतदान (4 निगम + 24 परिषद + 134 पालिका) |
| दूसरा चरण | शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 | शेष निकायों में मतदान |
| मतगणना | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | सभी 309 निकायों के नतीजे |
इस पूरे चुनाव के जरिए 10,245 पार्षद चुने जाएंगे, और इन दो चरणों में करीब 1.44 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
‘105 दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर’ – आखिर क्यों?
यहीं सवाल उठता है कि एक नगरीय निकाय के चुनाव में 105 नेताओं की प्रतिष्ठा क्यों दांव पर है? इसकी वजह राजस्थान की सियासत की भीतरी बनावट में छिपी है। निकाय चुनाव के नतीजे किसी पार्टी की जमीनी ताकत का सबसे सटीक पैमाना माने जाते हैं – यही वह आईना है जिसमें सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों की पकड़ साफ नजर आती है।
पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस के 105 दिग्गज नेताओं – जिनमें दोनों दलों के सांसद, विधायक, मंत्री और पूर्व मंत्री शामिल हैं – की राजनीतिक प्रतिष्ठा इस चुनाव के नतीजों से जुड़ी है। ये नेता टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक सीधे मैदान में हैं, और नतीजों के बाद निकायों के बोर्ड गठन की रणनीति भी इन्हीं के कंधों पर होगी। मतलब साफ है – वोटिंग तो पार्षदों के लिए है, लेकिन परीक्षा बड़े नेताओं की भी है।
मैदान में कौन-कौन? दोनों पार्टियों की रणनीति
इस चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपनी पूरी सियासी ताकत झोंक दी है:
- भाजपा की ओर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान तक जोर-शोर से जुटे हुए हैं। सत्ता में होने का फायदा। हालाकी भाजपा को UGC का खतरा हो सकता है।
- कांग्रेस की ओर: प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली चुनावी रणनीति के केंद्र में हैं। विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस निकाय चुनावों को अपनी वापसी का जरिया बनाना चाहती है।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों पार्टियों ने पहले से ही अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर रखी थीं। मतदान से पहले कांग्रेस ने युवा मतदाताओं को जोड़ने और संभावित उम्मीदवारों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया था।
वार्ड परिसीमन और आरक्षण: चुनाव से पहले की बड़ी तैयारी
किसी भी निकाय चुनाव में सबसे संवेदनशील चरण वार्ड परिसीमन और आरक्षण का होता है, और इस बार भी उसने चुनावी हलचल को बढ़ाया। स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश के 309 निकायों के लिए सीट आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की, जिसमें SC, ST, OBC और अनारक्षित श्रेणियों के लिए सीटों का निर्धारण लॉटरी के जरिए किया गया।
अगस्त के दूसरे पखवाड़े में जयपुर समेत कई जिलों में वार्ड आरक्षण लॉटरी निकाली गई, जिसे देखने के लिए दावेदारों की भीड़ उमड़ी थी।
OBC आरक्षण का समीकरण
राजस्थान की सियासत में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है, और निकाय चुनावों में भी यह चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पिछले निकाय चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि OBC उम्मीदवारों की भागीदारी उनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या से दोगुने से भी ज्यादा रही है – यानी आरक्षित सीटों के अलावा भी OBC प्रत्याशी आम सीटों पर खुलकर उतरते रहे हैं।
इस बार भी आरक्षण की लॉटरी ने कई निकायों में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं – कुछ नेताओं के लिए यह राहत बनी तो कुछ के लिए चुनौती।
हाईकोर्ट की समयसीमा: 15 नवंबर से पहले चुनाव अनिवार्य
यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि अदालती समयसीमा के तहत हो रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय निकायों के चुनाव 15 नवंबर 2026 से पहले कराने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने अदालत में दायर हलफनामे में यह आश्वासन दिया था कि चुनाव समय पर होंगे, और अदालत ने इसके लिए कोई अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया था।
इसी आदेश के बाद राज्य सरकार ने 20 जुलाई 2026 को पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों का पूरा कार्यक्रम हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया था।
मतदाताओं के लिए अहम बातें
- समय से पहुंचें: मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होगा – वोटिंग की समाप्ति से पहले पोलिंग बूथ पर पहुंचने की कोशिश करें
- पहचान पत्र: मतदाता पहचान पत्र (EPIC) या निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज़ साथ ले जाएं
- निडर होकर वोट करें: राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से किसी भी तरह के दबाव से मुक्त होकर साफ-साफ मतदान करने की अपील की है – चुनाव अधिकारियों ने भयमुक्त वातावरण में शांतिपूर्ण मतदान का भरोसा दिलाया है
- नतीजों का इंतज़ार: सभी 309 निकायों की मतगणना 14 सितंबर को एक साथ होगी, जिसके बाद पार्षदों के साथ-साथ निकाय प्रमुखों (अध्यक्ष/महापौर) की तस्वीर भी साफ होगी
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में कितने निकायों के लिए मतदान होना है?
राजस्थान की कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं। पहले चरण में 9 सितंबर को 162 निकायों (4 नगर निगम, 24 नगर परिषद, 134 नगर पालिका) में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को शेष निकायों में।
सवाल 2: मतदान की तारीख क्या है?
पहले चरण का मतदान बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजे से होगा। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा।
सवाल 3: मतगणना कब होगी?
सभी 309 निकायों के लिए मतगणना सोमवार, 14 सितंबर 2026 को होगी।
सवाल 4: कितने पार्षद चुने जाएंगे और कितने मतदाता हैं?
पूरे चुनाव में 10,245 पार्षद पदों के लिए करीब 1.44 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे।
सवाल 5: ‘105 नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर’ का मतलब क्या है?
इसका मतलब यह है कि भाजपा और कांग्रेस के 105 दिग्गज नेताओं (सांसद, विधायक, मंत्री, पूर्व मंत्री) की राजनीतिक प्रतिष्ठा निकाय चुनावों के नतीजों से जुड़ी है – टिकट वितरण से लेकर प्रचार और नतीजों के बाद बोर्ड गठन तक की जिम्मेदारी इन्हीं के पास है।
सवाल 6: चुनाव से पहले आरक्षण लॉटरी का क्या महत्व था?
वार्डों का आरक्षण (SC/ST/OBC/अनारक्षित) लॉटरी से तय हुआ, जिसने कई निकायों में चुनावी समीकरण बदल दिए। OBC उम्मीदवारों की भागीदारी परंपरागत रूप से आरक्षित सीटों से दोगुने से ज्यादा रही है।
सवाल 7: ये चुनाव किस समयसीमा में हो रहे हैं?
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव 15 नवंबर 2026 से पहले कराने का आदेश दिया था, जिसके तहत यह पूरा कार्यक्रम तय हुआ है।
निष्कर्ष
राजस्थान का यह निकाय चुनाव महज शहरी प्रशासन की बागडोर बदलने का मामला नहीं है – यह दोनों प्रमुख दलों की जमीनी ताकत की परख है, और इसमें सबसे बड़ा दांव 105 दिग्गज नेताओं की सियासी प्रतिष्ठा का है। 309 निकायों, 10,245 पार्षद पदों और 1.44 करोड़ मतदाताओं का यह चुनावी महायज्ञ दो चरणों में संपन्न होगा और 14 सितंबर को नतीजे तय करेंगे कि किस पार्टी की ग्राउंड रिपोर्ट कितनी मजबूत है। वार्ड परिसीमन से लेकर आरक्षण लॉटरी तक के सियासी समीकरणों के बीच अब सब कुछ मतदाताओं के हाथ में है – और आयोग का संदेश भी यही है, निडर होकर, निष्पक्ष होकर अपना वोट जरूर डालें। यह चुनाव राजस्थान की शहरी सियासत की अगली कुछ सालों की दिशा तय करेगा।
