मेटा का बड़ा फैसला: इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की 2 घंटे की सीमा, रात 12 से 6 बजे रहेगा बंद! नए नियम जानें

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मेटा का बड़ा फैसला: इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की 2 घंटे की सीमा, रात 12 से 6 बजे रहेगा बंद! नए नियम जानें
हरावल

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) ने इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर बच्चों और किशोरों (under-18) के लिए सुरक्षा के सबसे कठोर नियमों की घोषणा की है। अब 18 साल से कम उम्र का हर यूज़र स्वतः ही ‘टीन अकाउंट’ में आ जाएगा, जिसकी डिफ़ॉल्ट सेटिंग प्राइवेट होगी, हानिकारक कंटेंट सीमित होंगे और दिन में सिर्फ 2 घंटे ही स्क्रॉल करने की छूट होगी। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक चाइल्ड सेफ़्टी लॉक लगेगा – इसे कंपनी ने ‘डिजिटल बेडटाइम’ नाम दिया है। अमेरिका में यह सेटलमेंट पहले ही लागू हो चुका है, लेकिन भारत और दुनिया के सैकड़ों देशों में इसकी तारीख़ अभी अंतिम नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला? क्यों आया यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोरों की मानसिक सेहत, एल्गोरिदम की लत, और हानिकारक कंटेंट का मुद्दा लगातार उठता रहा। अमेरिका के कई राज्यों ने मेटा और उसकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ़ याचिकाएं दायर कीं; वहीं, फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) और राज्य अटॉर्नी जनरल ने सख्त कार्रवाई की। मेटा ने हाल में एक बड़े सेटलमेंट में करीब 18 अरब डॉलर का हर्जाना स्वीकार किया – और उसी समझौते के तहत ये नए सुरक्षा नियम मंज़ूर किए गए हैं।

कंपनी की ओर से जारी अपडेट में कहा गया है कि अगले 6 महीनों के भीतर ये सभी फ़ीचर ग्लोबली रोल आउट किए जाएंगे। अमेरिका में अधिकांश बदलाव सितंबर-अक्टूबर 2026 से लागू होने लगेंगे। भारत समेत अन्य देशों में यह कुछ चरणों में आएगा।

सूत्रों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लंबे समय से चेतावनी दी थी कि अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग बच्चों में चिंता, अवसाद, नींद की कमी और आत्म-सम्मान से जुड़ी समस्याओं को बढ़ाता है।

इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों के लिए 7 बड़े बदलाव

मेटा ने आधिकारिक रूप से कई कदमों की घोषणा की है। सबसे प्रमुख बदलाव नीचे दिए गए हैं:

1. स्वतः ‘टीन अकाउंट’ में बदलाव
18 साल से कम उम्र का हर नया और मौजूदा खाता स्वतः ‘टीन अकाउंट’ में शिफ्ट होगा। इन अकाउंट्स की सबसे बड़ी ख़ासियत होगी कि ये डिफ़ॉल्ट प्राइवेट होंगे और हानिकारक कंटेंट (जैमी स्ट्रक्चर्ड ट्रॉमा, नशे की सामग्री, ख़ुद को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री) को सीमित कर दिया जाएगा।

2. दैनिक 2 घंटे की समय सीमा
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर किशोर सप्ताह के सभी दिन मिलाकर अधिकतम 2 घंटे ही स्क्रॉल कर सकेंगे। अगर किशोर को इससे ज्यादा समय चाहिए, तो उसके पैरेंट्स को सेटिंग्स से इसकी छूट देनी होगी। अकेले बच्चे को यह लिमिट बढ़ाने का अधिकार नहीं होगा। यह तथ्य अभिभावकों को ‘आखिरी मौका’ का अधिकार देता है।

3. रात 12 से सुबह 6 बजे डिजिटल बेडटाइम कर्फ्यू
पूरी रात – आधी रात से सुबह 6 बजे तक – किशोर न तो नोटिफ़िकेशन पाएंगे, न ही ऐप इस्तेमाल कर सकेंगे। नाइट मोड (Night Mode) रात 12:00 बजे से शुरू होकर 6:00 बजे तक एक्टिव रहेगा। यह विशेष रूप से नींद की गुणवत्ता में सुधार और ब्लू-लाइट एक्सपोज़र की कमी के लिए है।

4. स्कूल मोड – सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक शांति
सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक पुश नोटिफ़िकेशन स्वतः बंद रहेंगे। इन घंटों में किशोर जागरूकता से परीक्षा और पढ़ाई पर ध्यान दे सकेगा, लेकिन ऐप खोल सकेगा – बस उसे किसी नए मैसेज की सूचना नहीं मिलेगी। इसका सीधा असर ध्यान-भंग और अनुपस्थिति पर पड़ेगा।

5. ऑटो प्ले और एल्गोरिदम बेस्ड पर्सनलाइज्ड फीड पर रोक
वीडियो ऑटो प्ले (अगले वीडियो का अपने आप चलना) को किशोर बंद कर सकेंगे। साथ ही, एल्गोरिदम-आधारित ‘एक्सप्लोर’ और ‘रील्स’ फीड को भी बंद करने का विकल्प मिलेगा। किशोर कोरोल ऑर्डर या क्रोनोलॉजिकल फीड पर वापस जा सकेंगे। पहले से ही किशोर के लिए पर्सनलाइजेशन कुछ हद तक सीमित है, पर अब यह और कड़ा होगा।

6. 60 और 90 मिनट के बाद उपयोग प्रॉम्प्ट
अगर कोई किशोर 60 मिनट लगातार या 90 मिनट कुल समय सोशल मीडिया पर बिताता है, तो ऐप उसे ‘लंबे समय से ब्रेक लें’, ‘शारीरिक गतिविधि करें’ जैसे सेहत संबंधी प्रॉम्प्ट दिखाएगा। ये ‘नन्हीं-नन्हीं पाबंदियां’ बच्चों को आत्म-नियंत्रण की आदत डालने में मदद करेंगी।

7. लाइक काउंट छिपाना और एक्सट्रीम फ़िल्टर/कॉस्मेटिक फ़िल्टर पर रोक
अगर कोई यूज़र ‘लाइक’ काउंट दिखाए जाने का विकल्प चाहता है, तो उसे बंद कर सकेगा। साथ ही, ‘एक्सट्रीम मेकअप फ़िल्टर’, ‘कॉस्मेटिक सर्जरी जैसा दिखने वाला फ़िल्टर’, और ‘बॉडी-शेमिंग’ जैसे किसी भी AR फ़िल्टर का इस्तेमाल किशोर नहीं कर पाएंगे। मानसिक सेहत के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ़िल्टर किशोरों में शरीर की नकारात्मक छवि (बॉडी इमेज) को बढ़ावा देते हैं।

पैरेंट्स (अभिभावकों) के लिए क्या-क्या नए टूल्स?

बच्चों की सुरक्षा की असली ताकत अब पैरेंट्स कंट्रोल के विस्तार में नज़र आएगी। मेटा ने पैरेंट्स के लिए कई बेहतरीन टूल्स की घोषणा की है:

a. समय की निगरानी और स्क्रीन टाइम रिपोर्ट
पैरेंट्स ऐप के ज़रिए किसी भी समय देख सकेंगे कि उनके बच्चे ने किस ऐप पर कितना समय बिताया। इसके लिए दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिपोर्ट उपलब्ध होगी।

b. सर्च हिस्ट्री देखने का अधिकार
पैरेंट्स अब यह देख सकेंगे कि उनका बच्चा इंस्टाग्राम/फेसबुक पर क्या-क्या सर्च कर रहा है। यह संदिग्ध शब्दों या खतरनाक कंटेंट की पहचान में सहायक होगा।

c. नए अकाउंट बनाने पर अलर्ट
कई किशोर नए ‘सीक्रेट अकाउंट’ बनाकर पैरेंट्स की नज़र से बचते थे। अब जब भी कोई बच्चा नया अकाउंट बनाएगा (चाहे मौजूदा अकाउंट से संबंधित हो या नया), पैरेंट्स को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।

d. संदिग्ध चैट अलर्ट
अगर कोई अजनबी किसी किशोर से बातचीत करेगा (विशेषकर वयस्कों द्वारा अनजान किशोरों के साथ प्राइवेट मैसेज), तो सिस्टम स्वतः पैरेंट्स को सूचित करेगा। मैसेज की सामग्री दिखाई नहीं देगी (गोपनीयता), पर अलर्ट होगा।

e. AI चैटबॉट का उपयोग नियंत्रित करना
मेटा AI (Meta AI) और इंस्टाग्राम के अंदर मौजूद AI कैरेक्टर्स जैसे किशोर अगर बात कर रहे हैं, तो पैरेंट्स इसे बंद भी कर सकेंगे। साथ ही, अगर बच्चा AI से ‘आत्म-हानि’, ‘अवसाद’, ‘ख़ुद को नुकसान’ जैसे विषय पर बात करे, तो मेटा पैरेंट्स को अलर्ट भेजेगा – यह एक AI आधारित सेंटिनल जैसा काम करेगा।

f. सुरक्षा शब्दकोश (Safety Wordbook)
मेटा ने एक ‘ऑनलाइन सुरक्षा शब्दकोश’ लॉन्च किया है जहां किशोरों और अभिभावकों दोनों को साइबर बुलिंग, निजी डेटा सुरक्षा और स्कैम से बचने के उपाय समझाए जाएंगे।

OpenAI ने भी की समानतायी घोषणा – चैटजीपीटी फॉर टीन्स

मेटा के इस बदलाव की परछाई अब अन्य टेक कंपनियों में भी दिख रही है। OpenAI ने हाल में ‘ChatGPT for Teens’ की घोषणा की है, जो किशोरों के लिए विशेष सुरक्षा मोड वाला चैटबॉट होगा। यह AI चैटबॉट किशोरों को अनुपयुक्त सामग्री से दूर रखेगा और आत्म-हानि जैसे संवेदनशील विषयों पर पेशेवर हेल्पलाइन नंबर सुझाएगा। यह दोनों बड़ी कंपनियों की ओर से एक साथ-साथ चल रही ‘AI युग में बच्चों की सुरक्षा’ की मुहिम है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत की बात करें तो वर्तमान में मेटा के ये नियम अमेरिका तक सीमित हैं। भारत में किशोरों के लिए IT नियम 2021 (Information Technology Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) के तहत कुछ प्रावधान पहले से मौजूद हैं, जैसे – 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान की आवश्यकता, अभिभावक की सहमति, और हानिकारक सामग्री पर रोक। लेकिन मेटा की ओर से भारत विशेष के लिए रोलआउट की अभी कोई आधिकारिक तारीख़ घोषित नहीं की गई है।

भारतीय अभिभावकों के लिए सलाह: इंस्टाग्राम की फ़ैमिली सेंटर सेटिंग्स को अभी से सक्रिय करें, अपने बच्चों के साथ खुली बातचीत रखें, और स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें।

अगर मेटा का यह मॉडल भारत में लागू होता है तो किशोरों के अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग पर अंकुश लगेगा और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, भारत सरकार भी अब बाल सुरक्षा (Child Safety) के मोर्चे पर और कदम उठाने की तैयारी में है – मसलन, नए डिजिटल इंडिया बिल में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अलग खंड शामिल किए जाने की चर्चा है।

क्या दुनिया के अन्य देशों में भी यह लागू होगा?

अमेरिका के बाद मेटा ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) में कुछ प्रायोगिक बदलावों की बात कही है। अन्य देशों में इसे तब ही रोलआउट किया जाएगा जब स्थानीय कानून और डेटा सुरक्षा के नियम ऐसा करने की छूट देंगे। फिलहाल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत दक्षिण एशियाई देशों में यह नीतिगत रूप से अनिवार्य नहीं है – मेटा को स्थानीय नियमों का पालन करना होगा।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर

मानसिक सेहत के विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग किशोरों में एंग्ज़ायटी (चिंता), डिप्रेशन, स्लीप डिसऑर्डर, और नेगेटिव बॉडी इमेज को बढ़ावा देता है। इसके अलावा FOMO (Fear of Missing Out), सोशल कम्पेरिज़न, और ऑनलाइन बुलिंग पहले से बड़ी समस्याएं हैं।

मेटा के इन बदलावों से विशेषज्ञों को तीन बड़ी उम्मीदें हैं:

  • नींद की गुणवत्ता में सुधार: रात का कर्फ्यू ब्लू लाइट के एक्सपोज़र को कम करेगा।
  • एल्गोरिदम की लत पर रोक: एल्गोरिदम किशोरों को बार-बार वही कंटेंट दिखाता है जिसे वे ज़्यादा देर तक देखते हैं – इससे ‘डोपामाइन लूप’ बनता है। पर्सनलाइज्ड फीड को बंद करने से यह चक्र टूटेगा।
  • बॉडी इमेज पर सकारात्मक असर: कॉस्मेटिक फ़िल्टर पर रोक से किशोरों को अपनी असली पहचान पर गर्व करना सिखाएगा।

मेटा ने क्या कहा?

मेटा के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है, “हम अपने प्लेटफ़ॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए हुए हैं। टीन अकाउंट के रोलआउट से अब तक करोड़ों किशोरों को एक सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव मिला है। नई पॉलिसी से हम पैरेंट्स और किशोरों दोनों को बेहतर टूल्स दे रहे हैं।” मार्क ज़करबर्ग ने पहले भी कहा है कि वह चाहते हैं कि मेटा प्लेटफ़ॉर्म “किशोरों को सुरक्षित रूप से तैयार होने में मदद करे।”

विशेषज्ञों की राय और असहमति

समर्थन में:

  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) ने मेटा के इन कदमों का स्वागत किया है।
  • मानसिक सेहत के विशेषज्ञ डॉ. ज़ीमरमैन ने कहा, “नाइट कर्फ्यू और 2 घंटे की सीमा वास्तव में किशोरों को ऑनलाइन निर्भरता से बचाने का कारगर तरीका है।”

विरोध में:

  • कुछ डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि यह ‘अभिभावक-नियंत्रित ऑनलाइन अनुभव’ किशोरों की स्वायत्तता को सीमित करता है।
  • कुछ किशोरों का मानना है कि फ़ीचर बंद करना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश है।

मेटा इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहता है कि अभिभावक और बच्चों दोनों के लिए लचीलापन बना रहेगा – सीमाएं ‘डिफ़ॉल्ट’ हैं, ‘फ़जूली’ नहीं।

नई पॉलिसी की समयरेखा (टाइमलाइन)

चरणसमयक्या लागू होगा
अमेरिका (सितंबर-अक्टूबर 2026)तत्कालटीन अकाउंट, नाइट कर्फ्यू, 2 घंटे लिमिट
अमेरिका (अक्टूबर-नवंबर 2026)1-2 महीने मेंपैरेंट्स कंट्रोल टूल्स (पूर्ण सुविधा)
अमेरिका + अन्य (नवंबर 2026-जनवरी 2027)3 महीने मेंअंतिम बदलाव – ऑटो प्ले, एल्गोरिदम, फ़िल्टर नियम
भारत + दक्षिण एशिया (अनुमानित 2026 के अंत तक)घोषणा अपेक्षितस्थानीय भाषा और कानून के अनुसार रोलआउट

पैरेंट्स के लिए तत्काल कार्य-योजना

मेटा की अनिवार्यता की प्रतीक्षा किए बिना भी पैरेंट्स अभी से ये कदम उठा सकते हैं:

  1. इंस्टाग्राम और फेसबुक दोनों पर ‘फ़ैमिली सेंटर’ सेटिंग सक्रिय करें।
  2. बच्चे से खुली बात करें – ऑनलाइन सुरक्षा और स्क्रीन टाइम के बारे में।
  3. बच्चे के खाते की सर्च हिस्ट्री रोज़ देखें और संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल संवाद करें।
  4. पासवर्ड और लॉगिन साझा रखें ताकि आपातकाल में खाता डिलीट किया जा सके।
  5. रात 10 बजे के बाद फ़ोन एक साझा कमरे में रखने की आदत डालें।
  6. स्कूल समय में नोटिफ़िकेशन म्यूट रखने के लिए बच्चे को प्रेरित करें।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल?

1. मेटा के नए नियम कब लागू होंगे?
अमेरिका में सितंबर-अक्टूबर 2026 से। भारत सहित अन्य देशों में रोलआउट की तारीख़ अभी अधिसूचित नहीं है।

2. क्या बच्चा अकेले दैनिक 2 घंटे की सीमा बढ़ा सकता है?
नहीं। इसके लिए पैरेंट्स की मंजूरी ज़रूरी होगी।

3. AI चैटबॉट पर क्या प्रतिबंध है?
मेटा ने किशोरों के लिए AI कैरेक्टर्स का उपयोग सीमित किया है। पैरेंट्स इसे पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं। साथ ही, AI पर ‘आत्म-हानि’ जैसी संवेदनशील चैट पर अलर्ट सिस्टम भी लागू होगा।

4. क्या यह सिर्फ इंस्टाग्राम-फेसबुक पर है?
हां। मेटा के अधिकारिक एप्लीकेशन – इंस्टाग्राम, फेसबुक, मैसेंजर और व्हाट्सऐप – अलग-अलग कैटेगरी में आते हैं। इन नियमों का सीधा असर फिलहाल इंस्टाग्राम और फेसबुक पर है।

5. क्या थर्ड-पार्टी ऐप और जैसे SnapChat, TikTok भी यह कर रहे हैं?
Snapchat और TikTok भी किशोर सुरक्षा के लिए अपने-अपने फ़ीचर्स ला रहे हैं, पर उनके नियम अलग हैं।

6. क्या वयस्क (18+) पर भी यह लागू होगा?
नहीं। यह नियम सिर्फ 18 वर्ष से कम उम्र के लिए है। वयस्कों के सामान्य खाते पहले की तरह काम करेंगे।

7. पैरेंट्स कंट्रोल कैसे एक्टिवेट करें?
इंस्टाग्राम में Settings > Family Center > Add Parent के ज़रिए एक्टिवेट किया जा सकता है। फेसबुक में भी बच्चे के खाते से जोड़कर मैनेजमेंट ऐक्सेस मिलता है।

8. क्या AI-powered मैसेजिंग में बदलाव होगा?
हां। अगर बच्चा AI चैटबॉट से आत्म-हानि, ख़ुद को नुकसान या अवसाद पर बात करेगा, तो पैरेंट्स को अलर्ट भेजा जाएगा।

एडिटोरियल नोट – यह लेख मेटा की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ (about.fb.com), BBC, ABC News, NYT, US News, The Guardian की रिर्पोटों और FTC/अमेरिकी सरकार के आधिकारिक बयानों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। भारत और अन्य देशों में रोलआउट की अंतिम तिथि की पुष्टि के लिए मेटा की आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा करें। यह रिपोर्ट सामान्य सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से है – कोई कानूनी या तकनीकी सलाह नहीं। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे मेटा ऐप्स की सेटिंग्स की नियमित समीक्षा करें और बच्चों के साथ खुली चर्चा बनाए रखें।

संदर्भ स्रोत:

  • about.meta.com – किशोर सुरक्षा का आधिकारिक समयरेखा
  • The New York Times / The Guardian – मेटा सॉल्टमेंट के विवरण
  • BBC News / ABC News – अमेरिका में रोलआउट के परिणाम
  • CNBC – OpenAI के ‘ChatGPT for Teens’ की घोषणा
  • FTC आधिकारिक बयान – अमेरिकी सेटलमेंट के कानूनी आधार

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