राजस्थान के मेवाड़ अंचल में स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर – जिसे भक्त “कलियुग के कृष्ण” और “व्यापारियों के आराध्य” के रूप में पूजते हैं – एक बार फिर गलत कारणों से सुर्खियों में है। चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया कस्बे में स्थित इस विश्व-प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर सोमवार-मंगलवार की दरमियानी घटना ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को झकझोरा है, बल्कि मंदिर मंडल की सुरक्षा-व्यवस्था पर भी बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
क्या हुआ उस रात?
मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात “टाइगर फोर्स” के गार्डों और मंदिर मंडल से जुड़े एक पुजारी परिवार के सदस्य – रवि महाराज – के बीच जमकर हाथापाई हुई। पूरी घटना मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई, और महज कुछ ही घंटों में इसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गया।

दो पक्ष, दो कहानियाँ
पुजारी-पुत्र रवि महाराज का पक्ष:
उनका आरोप है कि वे अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पार्किंग में खड़ी करने पहुँचे थे। तभी बिना किसी उकसावे के गार्डों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया, उनका वीडियो बनाया और फिर सामूहिक रूप से उन पर हमला बोल दिया।
गार्डों / सूत्रों का पक्ष:
वहीं दूसरी ओर, मंदिर परिसर के अन्य सूत्रों का दावा है कि पुजारी-पुत्र कथित तौर पर नशे की हालत में मौजूद थे और उन्होंने पहले गार्डों के साथ अपशब्दों का प्रयोग किया, जिसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
सच जो भी हो – वीडियो में दिखती हाथापाई और धक्का-मुक्की ने मंदिर की गरिमा को गहरी ठेस पहुँचाई है।
पुलिस जाँच जारी
मंडफिया थाना पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। हालाँकि, समाचार लिखे जाने तक न तो कोई FIR की धाराओं का खुलासा किया गया है और न ही मंदिर मंडल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। पुलिस की यही “प्रतीक्षा-नीति” सोशल मीडिया पर आलोचना का विषय बनी हुई है।
करोड़ों का चढ़ावा, फिर भी सुरक्षा शून्य?
यह वही मंदिर है जहाँ हर महीने का चढ़ावा करोड़ों रुपये में पहुँचता है-देश के सबसे धनी मंदिरों की सूची में इसका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मारवाड़ी व्यापारी वर्ग, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आए लाखों भक्त हर वर्ष यहाँ मन्नत माँगने पहुँचते हैं। बावजूद इसके, मंदिर परिसर में सुरक्षा और अनुशासन की स्थिति संतोषजनक क्यों नहीं है-यह सवाल बार-बार उठ रहा है।
पहला विवाद नहीं है यह
हाल के कुछ हफ्तों में यह कोई अकेली घटना नहीं है। कुछ समय पूर्व ही मंदिर के समीप मक्की की राब बेचने वाले एक स्थानीय युवक के साथ भी मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था में कहीं-न-कहीं गंभीर खामियाँ हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
उठते सवाल – जिनके जवाब जनता माँग रही है
- क्या सुरक्षा गार्डों की भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया पारदर्शी है?
- मंदिर मंडल की आंतरिक निगरानी व्यवस्था कहाँ चूक रही है?
- क्या मंदिर परिसर में शिकायत निवारण के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र मौजूद है?
- क्या भक्तों की सुरक्षा से पहले “अनुशासन थोपने” का रवैया सही है?
अंत में – आस्था बनाम प्रबंधन
सांवरिया सेठ केवल एक मंदिर नहीं, करोड़ों भक्तों की भावनात्मक धरोहर हैं। जब उसी परिसर में हिंसा के दृश्य सोशल मीडिया की सुर्खियाँ बनते हैं, तो सिर्फ प्रशासन ही नहीं – पूरा समाज सवालों के कठघरे में खड़ा होता है। ज़रूरत है कि मंदिर मंडल, ज़िला प्रशासन और पुलिस मिलकर एक स्थायी, पारदर्शी और भक्त-केंद्रित सुरक्षा मॉडल तैयार करें – ऐसा मॉडल जहाँ “गार्ड” और “श्रद्धालु” दोनों की गरिमा सुरक्षित रहे।
डिस्क्लेमर – “अपडेट जारी रहेगा”
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