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Wednesday, May 13, 2026
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सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 860वीं जयंती पर भव्य आयोजन: माँ आशापुरा मंदिर निवाउवा-गामड़ी में होगा ऐतिहासिक समारोह

सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 860वीं जयंती: 14 मई को निवाउवा-गामड़ी में उमड़ेगा क्षत्रिय समाज, अष्टधातु प्रतिमा स्थापना पर होगी ऐतिहासिक चर्चा

अंतिम हिन्दू सम्राट, वीर शिरोमणि सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 860वीं जयंती इस वर्ष अत्यंत भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप में मनाई जाने जा रही है। आयोजन समिति की ओर से जारी आधिकारिक निमंत्रण के अनुसार यह गौरवपूर्ण समारोह 14 मई 2026, गुरुवार (ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष द्वादशी) को माँ आशापुरा माताजी मंदिर, निवाउवा-गामड़ी के पावन प्रांगण में प्रात: 10:00 बजे से आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण – अष्टधातु प्रतिमा स्थापना

आयोजन समिति ने जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर सम्राट पृथ्वीराजजी चौहान की अष्टधातु से निर्मित भव्य प्रतिमा की स्थापना हेतु कार्य योजना पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनेगी।

आयोजन में मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के केन्द्रीय आध्यक्ष – श्री अशोक सिंहजी मेतवाला वीर शिरोमणि सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में ऐतिहासिक व्याख्यान देंगे।

समिति ने समस्त क्षत्रिय महानुभावों एवं समाजबंधुओं से सादर निवेदन किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं।

कौन थे सम्राट पृथ्वीराज चौहान? – एक संक्षिप्त ऐतिहासिक परिचय

सम्राट पृथ्वीराज चौहान (1166–1192 ई.) भारतीय इतिहास के उन महान योद्धाओं में से एक थे, जिनका नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्हें “राय पिथौरा” के नाम से भी जाना जाता है। वे चौहान (चाहमान) वंश के अंतिम महान हिन्दू सम्राट थे, जिन्होंने दिल्ली और अजमेर पर शासन किया।

जन्म एवं वंश:
पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 ई. में हुआ था। वे महाराज सोमेश्वर चौहान एवं रानी कर्पूरदेवी के पुत्र थे। मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने सिंहासन संभाला और अपनी असाधारण प्रतिभा से एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।

वीरता और पराक्रम:
पृथ्वीराज को “शब्दभेदी बाण” चलाने में महारत हासिल थी। वे केवल ध्वनि के आधार पर लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखते थे। उनके दरबार में चंदबरदाई जैसे महाकवि थे, जिन्होंने “पृथ्वीराज रासो” नामक प्रसिद्ध महाकाव्य की रचना की।

तराइन के युद्ध:

  • तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया और उसे जीवित छोड़ दिया।

क्षत्रिय गौरव का प्रतीक – आयोजन में शामिल होने का आह्वान

आयोजन समिति ने सभी समाजबंधुओं, क्षत्रिय परिवारों, युवाओं, माताओं-बहनों एवं विशेष रूप से नई पीढ़ी से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करें और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।

कार्यक्रम विवरण एक नज़र में

विवरणजानकारी
आयोजनसम्राट पृथ्वीराज चौहान की 860वीं जयंती
दिनांक14 मई 2026, गुरुवार
तिथिज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष द्वादशी
समयप्रात: 10:00 बजे
स्थानमाँ आशापुरा माताजी मंदिर, निवाउवा-गामड़ी
विशेष आकर्षणअष्टधातु प्रतिमा स्थापना पर चर्चा

संपर्क सूत्र

अधिक जानकारी एवं सहयोग हेतु आयोजन समिति ने यह मोबाइल नंबर भी दिए जिस पर आप संपर्क कर सकते है:

  • 94138 51599
  • 98282 94367
  • 98280 79183
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