Wednesday, September 16, 2026
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रामदेवरा में आस्था का सैलाब: भादवा मेले से पहले ही बाबा रामदेवजी की समाधि दर्शन के लिए लगीं लंबी कतारें, जयकारों से गूंजा पूरा धाम

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जहाँ आस्था की कतारें मेले से पहले ही इतिहास लिख देती हैं

राजस्थान की ऊषर भूमि में बसा रामदेवरा धाम – जिसे लोग प्रेम से “रूणिचा का धनी” का दरबार कहते हैं – इन दिनों एक बार फिर आस्था के अपूर्व सैलाब की गवाही बन रहा है। अजीब बात यह है कि भादवा मेले का औपचारिक आगाज तो अभी होना बाकी है, लेकिन समाधि दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ ने जैसे मेले का अनौपचारिक शुभारंभ पहले ही कर दिया है।

लगातार चौथे दिन भी समाधि परिसर की ओर जाने वाले मार्गों और मुख्य बाजार तक हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। “बाबा रामदेव की जय” के जयकारों से पूरा रामदेवरा गूंजायमान रह- मानो धरती और आसमान एक ही राग में गुंजार कर रहे हों।

कौन हैं बाबा रामदेव? – जिनकी समाधि पर उमड़ती है करोड़ों की श्रद्धा

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • बाबा रामदेवजी का जन्म विक्रम संवत 1409 (लगभग 1352 ई.) में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को रूणीचा में हुआ; वे 14वीं सदी के राजपूत शासक थे, जो बाद में लोक देवता बने।  
  • समाधि पर मंदिर 1931 में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंहजी ने बनवाया था 
  • कथा के अनुसार रामदेव पीर ने भैरव राक्षस का वध किया और दीन-दुखियों की सेवा में जीवन समर्पित किया।

बाबा रामदेव – जिन्हें रामदेव पीर, रामसा पीर और रूणिचा राय के नाम से भी पूजा जाता है – राजस्थान के सबसे लोकप्रिय लोकदेवताओं में से एक हैं। उनकी खासियत यह है कि यहां हिंदू और मुस्लिम – दोनों समुदाय के श्रद्धालु एक ही चूल्हे से खाते हैं, एक ही समाधि पर मत्था टेकते हैं। यह धार्मिक सद्भाव की जीवंत मिसाल है।

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया से एकादशी तक आयोजित होने वाला यह मेला राजस्थान का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है – यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु “झंडा यात्रा” निकालकर पैदल ही पहुंचते हैं।

कतारों की तस्वीर – समाधि से बाजार तक आस्था का अखंड सिलसिला

खबर के मुताबिक, समाधि परिसर तक पहुंचने वाले मार्गों पर घंटों लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन की बारी का इंतजार करते नजर आए। मुख्य बाजार, रेलवे स्टेशन मार्ग और मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में दिनभर आवाजाही बनी रही।

दिलचस्प यह है कि यह भीड़ केवल दर्शनार्थियों की नहीं – बल्कि मेले की पूरी तैयारी की जीवंत तस्वीर भी है:

  • हजारों छोटी-बड़ी दुकानें पहले ही सज चुकी हैं
  • खिलौने, धार्मिक सामग्री और पूजा सामग्री की दुकानों पर चहल-पहल
  • प्रसाद और खान-पान की दुकानों पर यात्रियों की भारी भीड़
  • होटल, धर्मशालाएं और भोजनालय यात्रियों से खचाखच

श्रद्धालु समाधि दर्शन के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में खरीदारी भी कर रहे हैं – यानी धार्मिक आस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था, दोनों को एक साथ गति मिल रही है।

मेला मतलब सिर्फ आस्था नहीं – जैसलमेर की अर्थव्यवस्था का भी उत्सव

रामदेवरा मेला जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय व्यापारियों के लिए वर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक आयोजन है। जब लाखों श्रद्धालु कई दिनों तक यहां ठहरते हैं, तो:

  • छोटे व्यापारियों को लाखों रुपये की बिक्री का अवसर मिलता है
  • परिवहन, आवास और खान-पान के क्षेत्र में रोजगार बढ़ता है
  • स्थानीय हैंडीक्राफ्ट और परंपरागत सामग्री को राष्ट्रीय बाजार मिलता है

यही वजह है कि भादवा मेले को राजस्थान का “ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महाकुंभ” भी कहा जाता है।

भादवा मेले की खासियत-क्यों है यह मेला सबसे अलग?

  1. धार्मिक सद्भाव का प्रतीक: हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों का संगम
  2. झंडा यात्रा की परंपरा: दूर-दूर से पैदल आने वाले श्रद्धालु हाथ में झंडे लेकर चलते हैं
  3. सांस्कृतिक महाकुंभ: लोकगीत, झांकियां और पारंपरिक कलाओं का समावेश
  4. ऐतिहासिक धरोहर: समाधि स्थल सदियों से आस्था का केंद्र

प्रशासन और व्यवस्थाओं पर नजर

इतनी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के लिए भी यह परीक्षा का घड़ी है। दर्शन की सुव्यवस्था, सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता – हर मोर्चे पर चुनौती है। जैसे-जैसे मेले की औपचारिक तारीख नजदीक आएगी, भीड़ और भी बढ़ने की संभावना है। श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और कतारों में धैर्य बनाए रखें।

कैसे पहुंचें रामदेवरा? – आस्था की इस नगरी तक का पूरा रास्ता

रामदेवरा जैसलमेर जिले में स्थित है और तीनों माध्यमों से सरलता से पहुंचा जा सकता है:

हवाई मार्ग (By Air)

  • निकटतम हवाईअड्डा: जोधपुर एयरपोर्ट (लगभग 180 किमी दूर)
  • वैकल्पिक: जैसलमेर एयरपोर्ट (लगभग 115 किमी दूर)
  • हवाईअड्डे से टैक्सी/बस द्वारा रामदेवरा पहुंचा जा सकता है

रेल मार्ग (By Train)

  • रामदेवरा रेलवे स्टेशन स्वयं मंदिर के निकट स्थित है – यह सबसे सुविधाजनक विकल्प है
  • जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनें उपलब्ध
  • मेले के दौरान विशेष ट्रेनें भी चलाई जाती हैं
  • स्टेशन से मंदिर तक ऑटो/पैदल पहुंचा जा सकता है

सड़क मार्ग (By Road)

  • जोधपुर से: लगभग 180 किमी – NH-125 होकर
  • जैसलमेर से: लगभग 115 किमी – पोकरण होकर
  • जयपुर से: लगभग 565 किमी
  • राजस्थान रोडवेज़ (RSRTC) की नियमित बसें और निजी टैक्सी सुविधा उपलब्ध
  • मेले के दौरान जिला प्रशासन अतिरिक्त बस सेवाएं चलाता है

मेले के दौरान विशेष सुविधाएं

  • प्रशासन द्वारा अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था
  • धर्मशालाएं, होटल और भोजनालय की उपलब्धता
  • झंडा यात्रा: अनेक श्रद्धालु परंपरानुसार पैदल ही धाम पहुंचते हैं – मार्ग में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा पेयजल एवं विश्राम स्थल की व्यवस्था

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: रामदेवरा का भादवा मेला कब शुरू होता है?
रामदेवरा का भादवा मेला हर वर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया से एकादशी तक आयोजित होता है। यह मेला आमतौर पर अगस्त-सितंबर के महीने में लगता है। 2026 में भी यही परंपरा जारी है – और इस बार तो औपचारिक आगाज से पहले ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ चुका है।

प्रश्न 2: भादवा मेला किस महीने में लगता है?
भादवा मेला हिंदू पंचांग के भाद्रपद माह में लगता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के प्रारंभिक सप्ताह तक आता है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा लोक-धार्मिक मेला माना जाता है।

प्रश्न 3: रामदेवरा कैसे पहुंचें?
रामदेवरा पहुंचने के तीन प्रमुख मार्ग हैं – रेल से रामदेवरा स्टेशन मंदिर के निकट ही है; सड़क से जोधपुर (180 किमी) और जैसलमेर (115 किमी) से RSRTC बसें व टैक्सी उपलब्ध हैं; हवाई मार्ग से जोधपुर या जैसलमेर एयरपोर्ट निकटतम हैं। मेले के दौरान विशेष ट्रेनें और अतिरिक्त बसें भी चलती हैं।

प्रश्न 4: बाबा रामदेव की समाधि दर्शन का शुभ समय क्या है?
समाधि दर्शन प्रातः काल से रात्रि तक चलता है। मेले के दौरान अलसुबह (भोर) में दर्शन करने से भीड़ कम मिलती है। वर्तमान में भीड़ अधिक होने के कारण कतार में कुछ घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है – अतः समय लेकर आएं।

प्रश्न 5: क्या रामदेवरा मेले में सभी धर्मों के लोग जा सकते हैं?
हां, रामदेवरा धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के श्रद्धालु बाबा रामदेव (रामसा पीर) के दरबार में समान श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। यही इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।

अंतिम शब्द – जहाँ भक्ति में भूल जाती है थकान

रामदेवरा की यह तस्वीर हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि भारतीय आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं। यहां समाधि तक पहुंचने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना कोई थकान नहीं, बल्कि तपस्या है। भादवा मेले का औपचारिक आगाज होने से पहले ही जो दृश्य दिखाई दे रहा है, उससे साफ है कि इस बार का मेला इतिहास रचने को तैयार है।

“बाबा रामदेव की जय!” – यह जयकारा अब सिर्फ धाम तक सीमित नहीं, पूरे राजस्थान की नब्ज बन चुका है।

Gargi Hada
Gargi Hadahttp://theharawal.com
Gargi Hada is a Spiritual Correspondent at TheHarawal.com. She covers Rajasthan’s spiritual traditions, ancient temples, religious heritage, sacred places, and the stories that shape its cultural identity. Through her writing, she explores the region’s faith, traditions, and timeless spiritual heritage for the modern reader.

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