Sunday, September 13, 2026
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FASTag यूजर्स के लिए बड़ी सुविधा! स्टिकर बदले बिना बदलें बैंक, OneTag से ऐसे होगा स्विच

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मुख्य बिंदु

  • 1. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 11 सितंबर 2026 को मुंबई में Global Fintech Fest 2026 के मंच से OneTag लॉन्च किया – अब FASTag यूजर्स वही भौतिक स्टिकर रखकर अपना issuer बैंक बदल सकेंगे।
  • 2. पोर्टिंग के बाद भी Tag ID और गाड़ी का पंजीकरण नंबर (RC) वही रहेगा – नया स्टिकर लगवाने या पुराना हटाने की जरूरत नहीं।
  • 3. यह सुविधा NHAI के Rajmargyatra मोबाइल ऐप के जरिए मिलेगी – पात्रता जांच, वेरिफिकेशन, सहमति और नए बैंक में ऑनबोर्डिंग, सब ऐप से ही।
  • 4. OneTag को IHMCL (NHAI की प्रोमोटेड कंपनी) और NPCI ने मिलकर विकसित किया है; NPCI ही केंद्रीय तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराएगा।
  • 5. FASTag की पहुंच देश में 98% से अधिक – अब तक करीब 13 करोड़ NETC FASTag जारी हुए हैं, जिनमें लगभग 6 करोड़ सक्रिय हैं।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह अब FASTag को भी बिना ‘नंबर’ बदले ‘ऑपरेटर’ बदलने की सुविधा मिल रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 11 सितंबर 2026 को मुंबई में Global Fintech Fest 2026 के दौरान OneTag लॉन्च किया – एक ऐसा पोर्टेबिलिटी सिस्टम, जो FASTag यूजर्स को उनका मौजूदा भौतिक स्टिकर वहीं पर रहने देगा, लेकिन उसे जारी करने वाला बैंक उनकी पसंद के अनुसार बदला जा सकेगा।

अब तक बैंक बदलने का मतलब था – पुराना FASTag बंद करवाना, नया आवेदन भरना और गाड़ी से एक स्टिकर हटाकर दूसरा चिपकाना। OneTag ठीक यही झंझट खत्म करने के लिए आया है।

OneTag है क्या? एक मिनट में समझें

OneTag कोई नया टोल सिस्टम या नया डिवाइस नहीं है – यह NETC FASTag की पोर्टेबिलिटी की सुविधा है। इसका मतलब आसान शब्दों में:

  • आपकी गाड़ी पर लगा FASTag वही रहेगा – उसी Tag ID और उसी गाड़ी नंबर के साथ।
  • सिर्फ issuer बैंक (वह बैंक जो आपका FASTag वॉलेट/अकाउंट चलाता है) बदला जा सकेगा।
  • टोल प्लाजा पर भुगतान की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं – टोल ऑपरेटर और प्लाजा पहले की तरह मौजूदा NETC ढांचे से ही लेन-देन प्रोसेस करेंगे।
  • यानी पोर्टेबिलिटी अब टैग तक नहीं, जारीकर्ता बैंक तक बढ़ा दी गई है।

पहले क्या था, अब क्या बदला?

पहलूOneTag से पहलेOneTag के बाद
बैंक बदलने पर स्टिकरपुराना FASTag बंद कर नया स्टिकर लेना पड़ता थावही स्टिकर रहेगा, बैंक पीछे बदल जाएगा
Tag ID और गाड़ी नंबरनए टैग के साथ बदल जाता थादोनों अपरिवर्तित रहेंगे
आवेदन प्रक्रियानए बैंक में शुरू से ऑनबोर्डिंगRajmargyatra ऐप से पोर्टिंग रिक्वेस्ट
टोल प्लाजा पर प्रोसेसमौजूदा NETC ढांचाकोई बदलाव नहीं – वही NETC ढांचा
पुराने वॉलेट का हिसाबयूजर की जिम्मेदारीपुराना issuer बैंक रिफंड व पेंडिंग लेन-देन का हिसाब पूरा करेगा

Rajmargyatra ऐप से बैंक कैसे बदलें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

OneTag की सुविधा NHAI के आधिकारिक Rajmargyatra मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध होगी। प्रक्रिया के मुख्य चरण:

  1. पात्रता जांच: ऐप पहले यह तय करेगा कि आपका FASTag पोर्टिंग के लिए पात्र है या नहीं।
  2. सुरक्षित वेरिफिकेशन: यूजर की पहचान की पुष्टि होगी।
  3. सहमति (Consent): आप पोर्टिंग की इच्छा दर्ज करेंगे।
  4. नया issuer बैंक चुनें: भाग लेने वाले बैंकों में से अपनी पसंद का बैंक चुनें।
  5. नए बैंक में ऑनबोर्डिंग: पोर्टिंग रिक्वेस्ट सफल होने के बाद नया बैंक आपकी FASTag सेवाएं संभालेगा।

पुराने बैंक की भूमिका: मौजूदा issuer बैंक ग्राहक सत्यापन और पुराने वॉलेट से जुड़े मामले – रिफंड और लंबित लेन-देन – पूरे करने के लिए जिम्मेदार रहेगा। पोर्टिंग पूरी होने के बाद ही नया बैंक सेवाएं संभालेगा।

कौन-कौन जुड़ा है OneTag से?

संस्थाभूमिका
IHMCLNHAI द्वारा प्रोमोटेड कंपनी, जिसने NPCI के साथ मिलकर OneTag विकसित किया
NPCIकेंद्रीय तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराना, पोर्टेबिलिटी प्रक्रिया में मदद और NETC नेटवर्क में issuer डिटेल अपडेट करना
NHAIRajmargyatra ऐप के जरिए यूजर्स तक सुविधा पहुंचाना
ISSUER बैंक (पुराना व नया)पुराना बैंक वेरिफिकेशन और वॉलेट हिसाब; नया बैंक ऑनबोर्डिंग और आगे की सेवाएं

FASTag का आंकड़ा – OneTag क्यों मायने रखता है

  • 🇮🇳 FASTag की पहुंच देश में 98% से अधिक – यानी यह देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम बन चुका है।
  • अब तक करीब 13 करोड़ NETC FASTag जारी हुए हैं, जिनमें से लगभग 6 करोड़ सक्रिय हैं।
  • सरकार की अपेक्षा है कि पोर्टेबिलिटी से नए स्टिकरों के उत्पादन, डिस्पैच और दोबारा जारी होने की संख्या घटेगी – यानी लागत और रद्दी-खर्च दोनों पर बचत।

रोचक तुलना: मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) ने यूजर्स को नंबर बदले बिना ऑपरेटर बदलने की आजादी दी थी – OneTag लगभग वही अवधारणा FASTag के लिए लाता है: स्टिकर वही, सेवा प्रदाता आपकी मर्जी का।

यह भी समझें – OneTag और नए टोलिंग बदलाव में फर्क

बहस में अक्सर उलझने होती हैं, इसलिए साफ कर दें:

  • OneTag सिर्फ issuer बैंक की पोर्टेबिलिटी की सुविधा है – टोल वसूली का तरीका इससे नहीं बदलता।
  • टोल प्लाजा और एक्वायरर्स के लिए कोई नई ट्रांजेक्शन प्रक्रिया लागू नहीं हो रही – सब कुछ मौजूदा NETC ढांचे से ही चलेगा।
  • गडकरी ने GFF 2026 के दौरान फरवरी तक बैरियर-मुक्त टोलिंग के लक्ष्य की भी बात कही है, जिसमें FASTag ने प्रतीक्षा समय 90% तक घटाया है – लेकिन वह एक अलग पहलू है; OneTag का सीधा संबंध सिर्फ बैंक-स्विच सुविधा से है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. OneTag क्या है?
OneTag एक NETC FASTag पोर्टेबिलिटी सिस्टम है, जिससे FASTag यूजर्स अपना मौजूदा भौतिक स्टिकर रखते हुए उसे जारी करने वाला बैंक बदल सकते हैं। इसे नितिन गडकरी ने 11 सितंबर 2026 को मुंबई में Global Fintech Fest 2026 पर लॉन्च किया।

Q2. क्या बैंक बदलने के लिए नया FASTag लगवाना पड़ेगा?
नहीं। मौजूदा FASTag वही रहेगा – Tag ID और गाड़ी का पंजीकरण नंबर भी अपरिवर्तित रहेगा। सिर्फ सेवाएं देने वाला बैंक बदलेगा।

Q3. बैंक स्विच की प्रक्रिया कहां से शुरू होगी?
NHAI के आधिकारिक Rajmargyatra मोबाइल ऐप से। ऐप में पात्रता जांच, वेरिफिकेशन, सहमति, बैंक चयन और ऑनबोर्डिंग – सभी चरण पूरे होंगे।

Q4. पुराने बैंक का बकाया या रिफंड किसे मिलेगा?
मौजूदा (पुराना) issuer बैंक ग्राहक सत्यापन और पिछले वॉलेट से जुड़े मामलों – रिफंड व लंबित लेन-देन – को सुलझाने के लिए जिम्मेदार रहेगा।

Q5. क्या टोल प्लाजा पर भुगतान का तरीका बदलेगा?
बिल्कुल नहीं। टोल प्लाजा और एक्वायरर्स लेन-देन पहले की तरह मौजूदा NETC ढांचे से ही प्रोसेस करेंगे।

Q6. OneTag कौन-कौन विकसित कर रहे हैं?
NHAI की प्रोमोटेड कंपनी IHMCL और NPCI ने संयुक्त रूप से विकसित किया है; NPCI केंद्रीय तकनीकी ढांचा और issuer अपडेट का ख्याल रखेगा।

निष्कर्ष

OneTag की शुरुआत FASTag के इस्तेमाल को थोड़ा और यूजर-फ्रेंडली बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। अब बैंक सेवा से असंतुष्ट यूजर को गाड़ी से स्टिकर नोचकर नया लगवाने की नौटंकी नहीं करनी पड़ेगी – वही टैग रहेगा, बस पीछे का बैंक बदल जाएगा। 13 करोड़ जारी और 6 करोड़ सक्रिय टैगों के पैमाने पर यह छोटी-सी सुविधा लाखों यूजर्स का समय, परेशानी और प्लास्टिक-खर्च बचा सकती है। बदलाव का असली असर तब दिखेगा, जब पोर्टिंग की प्रक्रिया ऐप पर आसान और तेज साबित होगी – लेकिन दिशा सही है: प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सेवा बेहतर होगी, और चुनाव का अधिकार यूजर के हाथ में आएगा।

सोर्स: Economic Times | CNBC-TV18 | PIB | NPCI (X)

Bhanwar Singh Thada
Bhanwar Singh Thadahttps://theharawal.com
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