Wednesday, September 16, 2026
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महंगे प्याज से मिलेगी राहत, 19 शहरों में सरकार ₹35 किलो बेचने की तैयारी; जानें कहां मिलेगा ?

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नई दिल्ली: रसोई का बजट बिगाड़ रही प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने राहत का मोर्चा खोल दिया है। खुदरा बाजार में जहां प्याज की कीमत कई जगह 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, वहीं आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार अब 19 शहरों में 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध करा रही है। यह कदम सिर्फ एक तात्कालिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि बढ़ती खाद्य महंगाई के बीच उपभोक्ता मनोबल को संभालने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

सरकारी एजेंसियों नैफेड और एनसीसीएफ के जरिए यह बिक्री की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सस्ता प्याज मोबाइल वैन और उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि उन इलाकों में भी राहत पहुंचे जहां नियमित सस्ते बिक्री केंद्रों तक पहुंच आसान नहीं है।

इस पहल की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर से हुई और अब इसका दायरा बढ़ाकर 19 शहरों तक ले जाया जा रहा है। रिपोर्ट में लखनऊ, वाराणसी और जयपुर का उल्लेख है, जहां मोबाइल वैन के जरिए बिक्री हो रही है, जबकि नोएडा में उपभोक्ता एनसीसीएफ आउटलेट और मोबाइल वैन दोनों माध्यमों से प्याज खरीद सकते हैं। इसके अलावा चेन्नई, कोलकाता, पटना और कोच्चि जैसे प्रमुख शहरों में भी सस्ती दर पर प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी बताई गई है।

दिल्ली के लिए इस योजना का पैमाना भी छोटा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने राजधानी के लिए 1,000 मीट्रिक टन प्याज उपलब्ध कराने की बात कही है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि दिल्ली के 13 जिलों में उचित मूल्य की दुकानों और मोबाइल वैन के माध्यम से उपभोक्ताओं को 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचा जाएगा।

दरअसल, प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि भारतीय रसोई की बुनियादी जरूरतों में शामिल है। ऐसे में इसकी कीमत में तेज उछाल सीधे घरों के मासिक खर्च पर असर डालता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली के खुदरा बाजारों में प्याज की कीमत फिलहाल 50 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास है, जबकि कुछ जगहों पर यह 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। यही वजह है कि सरकार ने अपने बफर स्टॉक को खुदरा बाजार में उतारकर कीमतों पर दबाव कम करने की रणनीति अपनाई है।

यह कदम महंगाई प्रबंधन के उस मॉडल को भी सामने लाता है, जिसमें सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एजेंसियों, वितरण नेटवर्क और स्थानीय पहुंच के जरिए सीधा बाजार हस्तक्षेप करती है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो आने वाले दिनों में प्याज की खुदरा कीमतों पर मनोवैज्ञानिक और वास्तविक-दोनों तरह का दबाव बन सकता है। हालांकि कीमतों में स्थायी राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आपूर्ति, स्टॉक और स्थानीय वितरण कितनी मजबूती से संभाला जाता है।

निष्कर्ष

सरकार की यह पहल आम उपभोक्ताओं के लिए तत्काल राहत का संदेश देती है। 35 रुपये किलो पर प्याज की बिक्री केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि खाद्य महंगाई के संवेदनशील मुद्दों पर अब तेज और सीधे हस्तक्षेप की नीति अपनाई जा रही है। आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि 19 शहरों तक पहुंची यह योजना क्या वाकई खुले बाजार की कीमतों को नरम कर पाती है या नहीं।

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Swati Singh
Swati Singhhttp://theharawal.com
Swati Singh is a writer at 'Harawal' and a lifestyle expert. Committed to accurate, simple, and trustworthy journalism. She strives to provide readers with a clear perspective.

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