500 रुपये में पट्टा, हर घर से फ्री कचरा उठाव, हर साल सफाईकर्मी भर्ती… कांग्रेस के शहरी घोषणा पत्र में 9 बड़े वादे

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गोविंद सिंह डोटासरा कांग्रेस शहरी घोषणा पत्र जारी करते हुए निकाय चुनाव जयपुर
हरावल

जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच कांग्रेस ने अपना शहरी एजेंडा मेज पर रख दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को पीसीसी वॉर रूम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का शहरी घोषणा पत्र जारी किया। इसमें आम शहरी मतदाता को साधने वाले वादों की भरमार है – 500 रुपये में मकान का पट्टा, घर-घर मुफ्त कचरा संग्रहण, हर साल सफाईकर्मियों की भर्ती जैसे नौ बड़े संकल्प शामिल हैं। इस मौके पर डोटासरा ने भाजपा सरकार पर चुनाव टालने, परिसीमन में गड़बड़ी और शहरों की बदहाली के आरोप लगाते हुए इसे कांग्रेस का ‘शहरी विकास रोडमैप’ करार दिया।

घोषणा पत्र में क्या-क्या – 9 बड़े वादे

कांग्रेस ने इस बार ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो शहरी जीवन के रोजमर्रा से सीधे जुड़े हैं। घोषणा पत्र के प्रमुख बिंदु ये रहे:

  • 500 रुपये में पट्टा – अपनी पुरानी सरकार की व्यवस्था को दोबारा शुरू करते हुए अभियान चलाकर मकानों के पट्टे बांटे जाएंगे, साथ ही कच्ची बस्तियों के नियमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
  • यूडी टैक्स में राहत – संपत्ति कर की समीक्षा कर उसे आम जनता के हित में तर्कसंगत बनाया जाएगा।
  • सफाईकर्मी भर्ती – लंबित भर्तियां पूरी होंगी और हर साल निकायों की जरूरत के मुताबिक नई भर्तियां होती रहेंगी।
  • मुफ्त कचरा संग्रहण – घर-घर से कचरा उठाने की सेवा नि:शुल्क की जाएगी और इसकी रोजाना निगरानी होगी।
  • सीवरेज-ड्रेनेज – जरूरत वाले इलाकों में नई सीवरेज लाइनें, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे।
  • मास्टर प्लान – जिन शहरों में मास्टर प्लान नहीं है, वहां जनता के सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा।
  • स्ट्रीट लाइट – शहरों में स्ट्रीट लाइट और एलईडी व्यवस्था को मजबूती दी जाएगी।
  • ऑनलाइन पारदर्शिता – निकायों के विकास कार्यों की प्रगति और आमजन के आवेदनों की स्थिति वेबसाइट पर दिखेगी, ताकि प्रशासन पर आम लोगों की नजर बनी रहे।
  • शहरी ढांचा – मूलभूत सुविधाओं से जुड़े बड़े कामों को प्राथमिकता सूची में रखकर कराया जाएगा।

भाजपा सरकार पर चौतरफा प्रहार

घोषणा पत्र जारी करने के साथ ही डोटासरा का निशाना सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की नीतियों पर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना की कार्यवाही के बाद ही सरकार को निकाय चुनाव कराने पड़े। परिसीमन में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि वार्ड बनाते समय कहीं 10 हजार तो कहीं 30 हजार आबादी वाले वार्ड तैयार कर दिए गए। सबसे बड़ा सवाल उन्होंने आरक्षण लॉटरी को लेकर उठाया – पहली बार नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के आरक्षण की लॉटरी एक साथ निकाली गई, जिसके चलते 10 नगर निगमों में से किसी में भी महापौर का पद एससी-एसटी के लिए आरक्षित नहीं हो सका।

डोटासरा ने जयपुर की बदहाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकाल में सड़कों के गड्ढे, ट्रैफिक जाम, कचरे के ढेर और आवारा पशुओं की समस्याएं जस की तस हैं। यहां तक कि स्टेच्यू सर्कल जैसे प्रमुख चौराहों पर एलईडी लाइटें भी नहीं जलतीं। इसके अलावा उन्होंने 23 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी न करने और मेट्रो परियोजना की डीपीआर में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए।

सियासी मायने: ‘कामकाज बनाम रोडमैप’ की लड़ाई

राजनीतिक नजरिए से देखें तो कांग्रेस ने इस बार निकाय चुनाव की लड़ाई को सिर्फ वार्डों और प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे ‘भाजपा का कामकाज बनाम कांग्रेस का शहरी विकास रोडमैप’ बनाने की रणनीति अपनाई है। पट्टा, सफाई, सीवरेज और ऑनलाइन पारदर्शिता जैसे जन-जुड़े मुद्दों को आगे रखकर पार्टी ने उन समस्याओं को धार दी है जिनसे शहरी मतदाता हर दिन दो-चार होता है।

दिलचस्प सियासी पहलू यह भी है कि भाजपा भी अपना ‘नगरीय विकास संकल्प पत्र’ लेकर मैदान में उतर चुकी है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा का यह दस्तावेज बजट की घोषणाओं की पुनरावृत्ति भर है – यानी शहरों में अब असली मुकाबला विकास के दावों और जनता के अपने अनुभवों के बीच होता दिखेगा। विश्लेषकों की नजर में कांग्रेस का यह कदम शहरी मतदाताओं, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग, को यह संदेश देने की कोशिश है कि जो वादे लागू करने की बात है, वे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बदलने वाले हैं।

आगे की राह

घोषणा पत्र जारी होने के बाद अब सबकी निगाहें चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। कांग्रेस का दावा है कि बोर्ड बनने के बाद ये संकल्प हकीकत में बदले जाएंगे। असली परीक्षा मतदान के दिन ही तय होगी, जब शहरी मतदाता फैसला करेगा कि भरोसा किस पर – वादों पर या पिछले अनुभवों पर।

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