राखी की डोर और चंद्र ग्रहण – इन दोनों का एक ही दिन मिलना अपने आप में दुर्लभ संयोग है। लेकिन जिन लोगों को लग रहा है कि ग्रहण की वजह से रक्षाबंधन का त्योहार प्रभावित होगा, उनके लिए राहत की खबर है।
साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। हालांकि, जानकारों के मुताबिक यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए यहां न तो सूतक काल मान्य होगा और न ही त्योहार से जुड़े किसी शुभ कार्य पर इसका कोई असर पड़ेगा।
प्रमुख बातें (हाइलाइट्स)
- 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) – रक्षाबंधन के दिन ही साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण
- ग्रहण का समय: सुबह 6:53 से दोपहर 12:32 बजे तक (भारतीय समय)
- भारत में दृश्यमान नहीं – इसलिए सूतक काल मान्य नहीं
- राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक
- राहत की बात: धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य सामान्य रूप से होंगे
कैसा होगा यह ग्रहण? ज्योतिष और विज्ञान की दो राय
इस ग्रहण को लेकर ज्योतिषाचार्यों और वैज्ञानिकों के बीच वर्गीकरण को लेकर दो अलग-अलग मत हैं, जो जानने लायक है:
ज्योतिषीय दृष्टि: ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, 28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण एक उपछाया चंद्र ग्रहण (पेनम्ब्रल लूनर एक्लिप्स) होगा।
वैज्ञानिक दृष्टि: वहीं, NASA और अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संस्थानों के अनुसार यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Deep Partial Lunar Eclipse) है, जिसमें ग्रहण के चरम समय पर चंद्रमा का 93 से 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की छाया (अम्ब्रा) में चला जाएगा – इसे कई जगह “ब्लड मून” प्रभाव के साथ देखा जा रहा है।
दोनों स्थितियों में एक बात समान है – यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय दृष्टिकोण से इसका कोई सूतक प्रभाव नहीं है।
भारत में दिखेगा या नहीं? कहां-कहां दिखाई देगा?
यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा। जिस समय यह ग्रहण अपने चरम पर होगा, उस वक्त भारत में दिन का समय होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा।
कहां दिखेगा: यह ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका (उत्तर-दक्षिण), यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के हिस्सों में दिखाई देगा।
वैश्विक समय-सारणी (UTC के अनुसार):
| घटना | UTC समय (28 अगस्त) |
|---|---|
| ग्रहण की शुरुआत | 01:23:58 |
| आंशिक ग्रहण की शुरुआत | 02:33:54 |
| ग्रहण का चरम | 04:13 |
| आंशिक ग्रहण की समाप्ति | 05:51:59 |
| ग्रहण की समाप्ति | 05:51:59 के बाद |
रक्षाबंधन पर कैसा रहेगा ग्रहण का असर?
यही वह सवाल है जो हर किसी के मन में है। धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो चूंकि ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए:
- सूतक काल मान्य नहीं होगा – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है, लेकिन यह नियम तभी लागू होता है जब ग्रहण उस क्षेत्र में दिखाई दे।
- राखी बांधने, पूजा-पाठ और अन्य मांगलिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी।
- त्योहार के संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह सामान्य रूप से संपन्न होंगे।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन भद्रा समाप्त होने के बाद राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इसलिए परिवार वाले किसी भी असुविधा के बिना इसी समयावधि में राखी का त्योहार मना सकते हैं। ग्रहण का समय (सुबह 6:53 से) भद्रा काल के बाद शुरू हो रहा है, फिर भी भारत में ग्रहण का कोई नियम लागू नहीं होगा।
ज्योतिषाचार्यों के खास उपाय – ग्रहण का प्रभाव कम करने के लिए
भले ही भारत में ग्रहण दिखाई न दे, लेकिन कई ज्योतिषाचार्य फिर भी इस दिन कुछ विशेष उपाय करने की सलाह देते हैं। पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय कर सकते हैं:
- मंत्र जाप: ग्रहण शुरू होने से पहले स्नानादि से निवृत्त होकर राहु-केतु के मंत्रों का जाप करें।
- दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद राहु और केतु से जुड़ी चीजों (काले तिल, गुड़, सरसों के तेल जैसी वस्तुएं) का दान करें।
- यात्रा में सावधानी: ग्रहण के समय वाहन तेज न चलाएं, जल्दबाजी न दिखाएं।
- बड़े निर्णय टालें: इस दौरान बड़े निर्णय सोच-समझकर ही लें और जोखिम भरे कार्यों से बचें।
ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें?
वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से ध्यान रखने योग्य बातें:
क्या करें:
- ग्रहण को सीधे नंगी आंखों से न देखें – हालांकि चंद्र ग्रहण देखना सूर्य ग्रहण जितना खतरनाक नहीं, फिर भी सतर्कता अच्छी
- दान-पुण्य और ध्यान-जाप के समय का सदुपयोग करें
- ग्रहण के बाद स्नान कर घर की सफाई करें
क्या न करें:
- जल्दबाजी में वाहन न चलाएं
- कोई भी बड़ा वित्तीय या जीवन का अहम फैसला न लें
- तीखी और भारी चीजों का सेवन ग्रहण काल में न करें (जो लोग नियम मानते हैं)
विज्ञान की नजर में: आखिर होता क्या है चंद्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आ जाती है कि सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। पृथ्वी की दो तरह की छायाएं होती हैं – गहरी छाया (अम्ब्रा) और हल्की छाया (पेनम्ब्रा)। जब चंद्रमा का कुछ हिस्सा अम्ब्रा में जाता है तो आंशिक ग्रहण होता है, और जब वह सिर्फ पेनम्ब्रा में रहता है तो उपछाया ग्रहण कहलाता है।
रक्षाबंधन का त्योहार भी हर साल पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है, और चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही संभव है – यही वजह है कि दोनों का एक ही दिन होना स्वाभाविक संयोग है। साल 2026 की बात करें तो इससे पहले 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लग चुका है, और 28 अगस्त का यह ग्रहण साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. चंद्र ग्रहण 2026 कब है?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबंधन के दिन लगेगा।
2. चंद्र ग्रहण का समय क्या है?
भारतीय समयानुसार सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक।
3. क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं। यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा। यह अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में दिखेगा।
4. क्या रक्षाबंधन पर सूतक काल मान्य होगा?
नहीं। चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा और राखी समेत सभी शुभ कार्य सामान्य रूप से होंगे।
5. राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है?
भद्रा काल समाप्त होने के बाद सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक राखी बांधी जा सकती है।
6. यह ग्रहण किस प्रकार का है – आंशिक या उपछाया?
ज्योतिषाचार्य इसे उपछाया ग्रहण बता रहे हैं, जबकि NASA और वैज्ञानिक संस्थानों के अनुसार यह गहरा आंशिक ग्रहण है जिसमें चंद्रमा का करीब 93-96% हिस्सा छाया में जाएगा। दोनों स्थितियों में भारत पर कोई प्रभाव नहीं है।
7. क्या चंद्र ग्रहण सीधे देखना खतरनाक है?
सूर्य ग्रहण की तुलना में चंद्र ग्रहण देखना आंखों के लिए उतना खतरनाक नहीं होता, लेकिन किसी भी खगोलीय घटना को बिना उचित सुरक्षा के लंबे समय तक देखने से बचना ही बेहतर है।
निष्कर्ष: त्योहार बनेगा, ग्रहण का साया नहीं
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का एक ही दिन पड़ना भले ही खगोलीय संयोग हो, लेकिन भारत के लिए यह खबर राहत भरी है – ग्रहण न दिखेगा, सूतक न मान्य होगा और राखी का त्योहार पूरे उल्लास के साथ मनाया जा सकेगा। जो लोग आस्था के अनुसार राहु-केतु के मंत्र जाप और दान जैसे उपाय करना चाहें, वे ज्योतिषाचार्यों की सलाह मान सकते हैं। बाकी के लिए यही संदेश है – परंपरा का सम्मान करें, विज्ञान को समझें और राखी की मिठास को ग्रहण जैसी किसी भी बात से फीका न पड़ने दें। अपनी बहन के हाथ की राखी और भाई का प्यार – यही असली पर्व है।
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