Wednesday, September 16, 2026
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Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त-इस बार कब बांधें राखी? भद्रा का साया, उदया तिथि और शुभ मुहूर्त

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भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व

सावन का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है और भारतीय घरों में एक ही चर्चा गूँज रही है – “इस बार रक्षाबंधन 27 अगस्त को है या 28 अगस्त को?” पंचांग की गहराइयों से निकला यह सवाल सिर्फ़ तारीख का नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय शुद्धता का है। भद्रा के साये, पूर्णिमा तिथि की करवट और उदया तिथि के सिद्धांत-इन तीनों का त्रिकोण इस बार बहनों की कलाई पर सजने वाले रक्षा-सूत्र की तारीख तय करेगा।

आइए, इस पूरे संशय का समाधान परंपरा और ज्योतिष-दोनों की कसौटी पर करते हैं।

पूर्णिमा तिथि: कब से कब तक?

शास्त्रों के अनुसार-

  • पूर्णिमा प्रारंभ: 27 अगस्त 2026, प्रातः 9:08 बजे
  • पूर्णिमा समाप्त: 28 अगस्त 2026, प्रातः 9:48 बजे

यानी पूर्णिमा दो दिनों तक फैली हुई है, और यही स्थिति असमंजस का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। लेकिन सनातन धर्म-शास्त्र में इस तरह के ‘ओवरलैप’ के लिए एक स्पष्ट नियम है – उदया तिथि का सिद्धांत।

‘उदया तिथि’ का नियम – इसीलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त को

हिन्दू पंचांग की मूल परंपरा कहती है-“जो तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान होती है, वही उस दिन के लिए मान्य होती है।”

चूँकि 28 अगस्त की सुबह के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान है, अतः रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। पंडित प्रवीण मिश्र ने भी इसी शास्त्रीय सिद्धांत को आधार बनाकर कह दिया है-“27 नहीं, 28 अगस्त पर बांधें राखी।”

भद्रा का साया-इस बार बहनों के लिए राहत की खबर

हर वर्ष रक्षाबंधन पर सबसे बड़ी चिंता होती ह- भद्रा काल की। शास्त्रों में भद्रा में राखी बांधना निषिद्ध माना गया है, क्योंकि इसे अशुभ फल देने वाला काल कहा गया है। लेकिन इस बार बहनों के लिए यह सबसे बड़ी राहत की ख़बर है-

  • भद्रा प्रारंभ: 27 अगस्त 2026, प्रातः 9:08 बजे
  • भद्रा समाप्त: 27 अगस्त 2026, रात्रि 9:32 बजे

यानी भद्रा का पूरा प्रकोप 27 अगस्त को ही समाप्त हो जा रहा है28 अगस्त को भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा-यह वर्षों बाद बनने वाला ऐसा शुभ संयोग है, जब बहनें बिना किसी शंका के, पूरे दिन खुले मन से राखी बांध सकेंगी।

राखी बांधने के दो सबसे शुभ मुहूर्त (28 अगस्त 2026)

पंचांग के अनुसार इस बार दो श्रेष्ठ मुहूर्त निकल रहे हैं – दोनों ही अत्यंत शुभ और फलदायी माने जा रहे हैं:

मुहूर्तसमयविशेषता
प्रथम शुभ मुहूर्तप्रातः 6:24 से 9:48 बजे तकसूर्योदय के बाद का शुद्ध सात्विक काल—सर्वश्रेष्ठ माना गया है
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:01 से 1:05 बजे तकदिन का सबसे प्रभावशाली एवं विजयकारक क्षण

विशेषज्ञ सुझाव: यदि संभव हो तो प्रथम शुभ मुहूर्त (सुबह 6:24 से 9:48) के भीतर ही रक्षा-सूत्र बांध लें, क्योंकि इसी समय पूर्णिमा तिथि का पुण्यकाल भी विद्यमान रहेगा।

रक्षाबंधन पूजन विधि – परंपरा और शुद्धता का समन्वय

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि एक पूर्ण पूजन अनुष्ठान है। इस विधि का पालन आपके पर्व को और अधिक फलदायी बनाएगा:

1. पूजा-थाली की तैयारी:

  • अक्षत (चावल), रोली, कुमकुम, दीपक, मिठाई
  • नारियल या श्रीफल
  • नई राखी (सूत्र)
  • गंगाजल का पात्र

2. संकल्प एवं शुद्धि:
प्रातःस्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके आसन पर बैठाएँ।

3. तिलक व राखी विधि:
भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएँ, दीपक से आरती उतारें, फिर दाएँ हाथ की कलाई पर राखी बांधें

4. मंत्रोच्चारण:

“येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल॥”

5. आशीर्वाद व उपहार:
मिठाई खिलाकर भाई का मुँह मीठा कराएँ, भाई बहन को उपहार व आशीर्वाद दें।

सावन पूर्णिमा के अन्य विशेष महत्व

28 अगस्त 2026 का दिन केवल रक्षाबंधन तक सीमित नहीं है-यह कई पवित्र अनुष्ठानों का संगम भी है:

  • श्रावणी उपाकर्म – ब्राह्मणों द्वारा नवीन यज्ञोपवीत धारण
  • हयग्रीव जयंती – विद्या के देवता का प्रकटोत्सव
  • नारियल पूर्णिमा / कज्जली पूर्णिमा – तटीय एवं ग्रामीण भारत में विशेष महत्व
  • गायत्री जयंती – वेदमाता की पूजा का पावन अवसर

अर्थात्, इस दिन का हर पल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है।

इस बार क्यों है यह रक्षाबंधन विशेष?

  • भद्रा-मुक्त पूर्ण दिन – बहनें पूरे दिन शुभ फल पा सकेंगी
  • शुक्रवार का शुभ संयोग – माँ लक्ष्मी और वैभव का दिन
  • दो शुभ मुहूर्तों का दुर्लभ मेल – सुबह और मध्याह्न, दोनों समय शुभ
  • उदया तिथि से जुड़ा शास्त्रीय समर्थन – कोई तिथि-विवाद नहीं
  • सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रबल संकेत – कार्य सिद्धि हेतु उत्तम

रक्षाबंधन – आस्था, परंपरा और परिवार का उत्सव

रक्षाबंधन केवल एक धागा नहीं, बल्कि वचन का बंधन है-बहन की कलाई से निकलकर भाई के हृदय में उतर जाने वाला अटूट संकल्प। इस बार जब भद्रा भी बाधा नहीं बन रही, उदया तिथि भी साथ है, और दो शुभ मुहूर्त एक साथ मिल रहे हैं-तो यह पर्व एक अलौकिक संयोग के साथ आ रहा है।

तो इस 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को-बिना किसी संशय के, पूरे मन से, अपनी परंपरा को गले लगाइए। क्योंकि यह पर्व केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि रिश्तों की सबसे मीठी विरासत है।

Gargi Hada
Gargi Hadahttp://theharawal.com
Gargi Hada is a Spiritual Correspondent at TheHarawal.com. She covers Rajasthan’s spiritual traditions, ancient temples, religious heritage, sacred places, and the stories that shape its cultural identity. Through her writing, she explores the region’s faith, traditions, and timeless spiritual heritage for the modern reader.

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