उदयपुर, 23 अगस्त। राजस्थान के उदयपुर शहर की पहचान कही जाने वाली सज्जनगढ़ लायन सफारी पर रविवार को मातम छा गया। साढ़े पांच साल की मादा एशियाटिक शेरनी ‘सुनैना’ ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब तीन महीने से बीमार चल रही सुनैना की मौत ने सिर्फ सफारी की रौनक ही नहीं छीनी, बल्कि इस नई सफारी के प्रबंधन और योजना पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 16 फरवरी 2026 को धूमधाम से शुरू हुई इस सफारी के खाते में महज छह महीने में ही पहला नुकसान दर्ज हो गया। अब सफारी का कुनबा सिमटकर सिर्फ एक नर शेर ‘सम्राट’ पर आ गया है, जो अपनी साथी की मौत के बाद पूरे एनक्लोजर में अकेला रह गया है।
तीन महीने की लंबी जंग, फिर अचानक तबीयत बिगड़ी
सुनैना की बीमारी कोई नई नहीं थी। वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 24 मई से ही उसे पशु चिकित्सकों की लगातार निगरानी में रखा गया था। इलाज का असर भी दिखा – 21 जुलाई से 20 अगस्त के बीच सुनैना की सेहत में लगातार सुधार दर्ज किया गया। इस दौरान वह नियमित रूप से पूरा भोजन ले रही थी और डॉक्टरों को उम्मीद जगी थी कि वह जल्द ही पूरी तरह ठीक हो जाएगी।
मगर 21 अगस्त की सुबह सब कुछ बदल गया। केयरटेकर्स ने देखा कि सुनैना ने रात में दिया गया भोजन पूरी तरह नहीं खाया। मेडिकल टीम ने तुरंत अलर्ट होकर उसके रक्त के नमूने लिए और जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज फिर से शुरू किया। 22 और 23 अगस्त को भी दवाइयां और जरूरी उपचार जारी रहा, लेकिन रविवार दोपहर अचानक हालत इतनी गंभीर हो गई कि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद सुनैना को बचाया नहीं जा सका।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मुकेश सैनी ने बताया, “22 और 23 अगस्त को भी रक्त जांच की रिपोर्ट के अनुसार उसे आवश्यक दवाइयां और उपचार दिया गया। रविवार दोपहर अचानक उसकी हालत गंभीर हो गई और उपचार के बीच उसकी मौत हो गई।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी मौत की असली वजह
मौत के बाद पारदर्शिता के लिए वन विभाग ने तुरंत तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया। डॉ. शैलेन्द्र शुक्ला, डॉ. महेन्द्र मेहता और डॉ. हिमांशु व्यास ने रविवार शाम 4:30 बजे शव का पोस्टमार्टम किया। दिलचस्प संयोग यह है कि डॉ. हिमांशु व्यास उसी टीम का हिस्सा थे, जो 2024 में सुनैना और सम्राट को गुजरात के जूनागढ़ से उदयपुर लेकर आई थी।
पोस्टमार्टम के बाद रविवार शाम करीब 6 बजे सज्जनगढ़ जैविक उद्यान परिसर में स्थित निर्धारित श्मशान स्थल पर पूरी प्रक्रिया के साथ सुनैना का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मुकेश सैनी, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभुलाल मीणा, सहायक उप निरीक्षक योगेश कुमार, पटवारी गिरधर सिंह राजपूत समेत जैविक उद्यान का स्टाफ और स्थानीय ईडीसी (इको-डेवलपमेंट कमेटी) के सदस्य मौजूद रहे।
फिलहाल मौत का सटीक कारण अभी पुष्ट नहीं हुआ है – पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आ सकेगी। यही वह बिंदु है, जिस पर वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हैं।
छह महीने की सफारी, और पहला बड़ा सवाल
सज्जनगढ़ लॉयन सफारी का उद्घाटन इसी साल 16 फरवरी 2026 को हुआ था। शुरुआत में इसे उदयपुर के पर्यटन नक्शे पर बड़े आकर्षण के तौर पर पेश किया गया था। सफारी खुलने के वक्त सुनैना और सम्राट – शेरों का एक स्वस्थ जोड़ा – इसकी मुख्य जान थे। लेकिन महज छह महीने के भीतर एक शेरनी की मौत ने सफारी प्रबंधन की तैयारियों, बाड़ों की स्थिति और वन्यजीवों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।
खासकर वह समय और बेहद अहम है, जब जयपुर समेत राज्य के अन्य जैविक उद्यानों में भी शेरों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी न सिर्फ सुनैना की मौत की वजह जानना चाहते हैं, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि शेष बचे ‘सम्राट’ की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए प्रशासन ने क्या योजना बनाई है।
जूनागढ़ से उदयपुर तक का सफर
सुनैना और सम्राट का उदयपुर से पुराना नाता है। अगस्त 2024 में वन विभाग की टीम इन दोनों एशियाटिक शेरों को गुजरात के जूनागढ़ स्थित प्रसिद्ध शकरबाग जू से सज्जनगढ़ लेकर आई थी। यह लेन-देन किसी खरीद-बिक्री का नतीजा नहीं था, बल्कि वन विभाग के एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत हुआ था – शकरबाग जू को सियार, लोमड़ी, चिंकारा और जंगली बिल्ली सहित 14 वन्यजीव देकर शेरों का यह जोड़ा हासिल किया गया था।
लाने के बाद दोनों को 21 दिन के क्वारंटीन में रखा गया था और तभी तय हुआ था कि आने वाले समय में लॉयन सफारी शुरू होने पर यह जोड़ा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। तब सुनैना महज तीन साल की थी और उसकी उम्र के हिसाब से कुनबा बढ़ने की उम्मीदें भी जताई जा रही थीं। वहीं, इस साल की भीषण गर्मी के दौरान हीटवेव के खतरे को देखते हुए पार्क प्रशासन ने जानवरों के लिए विशेष कूलिंग व्यवस्था भी की थी।
विशेषज्ञों की चिंता: एशियाटिक शेर विलुप्ति की कगार पर
वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए सुनैना की मौत सिर्फ एक इकाई का नुकसान नहीं है। विश्व स्तर पर एशियाटिक शेरों की संख्या सीमित है और भारत में इनकी एकमात्र जंगली आबादी गुजरात के गिर वन में पाई जाती है। इस लिहाज से बंदी (कैप्टिव) प्रजनन और पार्कों में इनकी सुरक्षा संरक्षण की दिशा में अहम कड़ी मानी जाती है। ऐसे में बीमारी के चलते एक युवा शेरनी की मौत, संरक्षण कार्यक्रमों में स्वास्थ्य निगरानी और प्रबंधन मानकों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
आगे क्या?
अभी सबसे अधिक इंतजार पोस्टमार्टम रिपोर्ट का है, जिससे मौत के वास्तविक कारण का पता चलेगा। साथ ही, बड़ा सवाल यह भी है कि सफारी में सिर्फ ‘सम्राट’ के रहते इसके भविष्य की योजना क्या होगी – क्या जल्द नई शेरनी लाई जाएगी, या सफारी को वर्तमान स्वरूप में ही चलाया जाएगा? वन विभाग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तब तक उदयपुर के इस सफारी पर मौन शोक छाया हुआ है, और पूरा ध्यान ‘सम्राट’ के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर टिका है।
नोट: इस रिपोर्ट में दी गई सभी तारीखें, नाम और घटनाक्रम वन विभाग के अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित हैं। मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुष्टि के बाद ही कहा जा सकेगा।
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