Wednesday, September 16, 2026
Homeविविधमनोरंजनकृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर विवाद: कपड़ों से आगे सम्मान और...

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर विवाद: कपड़ों से आगे सम्मान और परंपरा की बहस

-

कृति सेनन के GIVA रक्षाबंधन विज्ञापन पर उठे सवालों के बीच अभिनेत्री ने कहा – महिलाओं का सम्मान कपड़ों से नहीं, उनके विचार और संस्कारों से तय होता है।

कृति सेनन के विज्ञापन ने फिर छेड़ी पुरानी बहस

रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और भावनात्मक त्योहार पर आधारित एक ज्वेलरी विज्ञापन अब फैशन, परंपरा और महिला सम्मान से जुड़ी बहस का केंद्र बन गया है। इस विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन नजर आती हैं। उनका आधुनिक इंडो-वेस्टर्न लुक कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आया और देखते ही देखते विज्ञापन की कहानी से ज्यादा चर्चा उनके पहनावे की होने लगी।

यह अभियान ज्वेलरी ब्रांड GIVA से जुड़ा है और इसका नाम “Furever Sibling” बताया गया है। विज्ञापन में कृति अपने भाई को राखी बांधती हैं। इसके बाद वह अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती दिखाई देती हैं – यानी अभियान भाई-बहन के रिश्ते के साथ पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानने की भावना को भी सामने रखता है।

ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज बना विवाद की वजह

विज्ञापन में कृति सेनन ने ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस लुक को रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक अवसर के लिए अनुपयुक्त बताया। आलोचकों का तर्क था कि त्योहार से जुड़े विज्ञापन में परिधान का चुनाव अधिक पारंपरिक होना चाहिए था।

विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। कुछ प्रतिक्रियाओं में विज्ञापन की तुलना दूसरे धार्मिक त्योहारों से की गई और सवाल उठाया गया कि क्या ईद या क्रिसमस जैसे मौकों पर भी इसी तरह की आधुनिक स्टाइलिंग को स्वीकार किया जाता। दूसरी ओर, कई लोगों ने कृति का समर्थन करते हुए कहा कि किसी महिला के कपड़ों को उसकी संस्कृति, चरित्र या पारिवारिक मूल्यों का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

कंगना रनौत की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा

इस मामले में अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया ने भी बहस को तेज कर दिया। उन्होंने कृति का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को इसी विज्ञापन से जोड़कर देखा गया। कंगना ने महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग तरह के परिधानों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब विकल्प इतने हैं, तो भाई को राखी बांधने के लिए कथित तौर पर बिकिनी जैसे परिधान का चुनाव क्यों किया गया। उन्होंने विज्ञापन को “creepy” भी बताया।

यह टिप्पणी व्यक्तिगत पसंद से आगे बढ़कर उस व्यापक सामाजिक सोच को सामने लाती है, जिसमें किसी महिला के कपड़ों को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया जाता है। खासकर तब, जब वह महिला किसी त्योहार, परिवार या संस्कृति से जुड़े दृश्य में दिखाई दे रही हो।

कृति सेनन ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए दिया जवाब

कृति सेनन ने इस विवाद का जवाब सीधे किसी व्यक्ति का नाम लेकर नहीं दिया। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए एक बयान में महिलाओं के पहनावे और संस्कृति को लेकर सवाल उठाया। उनका संदेश यह था कि आधुनिक फैशन अपनाने का अर्थ अपनी परंपराओं से दूरी बनाना नहीं है।

“When will we stop telling women what to wear?? Ethnic fashion has evolved over the years, but still a woman’s respect for her culture is measured with just her clothes!! Culture & Traditions are in her heart, not in her neckline.”
– कृति सेनन, इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा बयान

कृति के इस बयान का मूल आशय साफ है-किसी महिला की संस्कृति के प्रति आस्था उसके कपड़ों की लंबाई, शैली या नेकलाइन से तय नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, परंपरा और भावनाएं व्यक्ति के भीतर होती हैं; उन्हें केवल बाहरी रूप-रंग से मापना एक सीमित दृष्टिकोण है।

रक्षाबंधन को लेकर कृति की अलग व्याख्या

कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की परंपरा को भी अपने अनुभव के संदर्भ में समझाया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे के स्वास्थ्य, खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह स्नेह और सुरक्षा की भावना उनके पालतू कुत्तों तक भी पहुंचती है, क्योंकि वे उनके परिवार का हिस्सा हैं।

यह दृष्टिकोण रक्षाबंधन को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा किए जाने की पारंपरिक धारणा तक सीमित नहीं रखता। कृति ने रिश्ते को पारस्परिक देखभाल, भावनात्मक जुड़ाव और परिवार की व्यापक परिभाषा से जोड़ने की कोशिश की है।

असली सवाल: त्योहार की भावना या पहनावे का पैमाना?

इस विवाद की सबसे अहम परत यही है कि किसी विज्ञापन को देखने के बाद दर्शक सबसे पहले क्या नोटिस करता है – उसकी भावना, कहानी और संदेश या कलाकार के कपड़े? विज्ञापन पर असहमति होना स्वाभाविक है। दर्शक यह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं कि कोई लुक उन्हें त्योहार के अनुरूप लगता है या नहीं। लेकिन असहमति और व्यक्तिगत नैतिक निर्णय के बीच की सीमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

फैशन बदल रहा है और विज्ञापन उद्योग भी त्योहारों को नए दृश्य-शिल्प और आधुनिक स्टाइलिंग के साथ प्रस्तुत कर रहा है। इस बदलाव से सहमत या असहमत हुआ जा सकता है, लेकिन महिला के परिधान को उसकी संस्कृति और सम्मान का अंतिम प्रमाण मानना उस बहस को बेहद संकीर्ण बना देता है।

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर उठी बहस इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केवल एक अभिनेत्री के कपड़ों का मामला नहीं रह गई है। यह सवाल अब इस बात पर है कि परंपरा को कौन परिभाषित करेगा, महिलाओं के पहनावे पर अधिकार किसका होगा और क्या किसी रिश्ते की पवित्रता को कपड़ों के आधार पर परखा जाना चाहिए। विज्ञापन की शैली पर बहस हो सकती है, लेकिन सम्मान का मूल्यांकन केवल नेकलाइन से नहीं किया जा सकता।

Swati Singh
Swati Singhhttp://theharawal.com
Swati Singh is a writer at 'Harawal' and a lifestyle expert. Committed to accurate, simple, and trustworthy journalism. She strives to provide readers with a clear perspective.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here