भारत की सड़कों पर हर रोज़ लाखों कैब-ऑटो-बाइक चलती हैं और करोड़ों पार्सल साइकिल-स्कूटर पर सवार होकर घर-घर पहुँचते हैं। इन्हीं हाथों से चलने वाली गिग इकॉनमी अब अपने सबसे बड़े मोड़ पर खड़ी है – सरकार जहाँ इन कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा देने जा रही है, वहीं इस सुरक्षा कवच का खर्च कौन उठाए, इसे लेकर नियमों पर एक ऐसा तकनीकी विवाद छिड़ गया है जो पूरे प्लेटफॉर्म कारोबार की दिशा तय कर सकता है। सवाल सिर्फ इतना है – अंशदान की गणना कंपनी के सालाना टर्नओवर से हो या कामगारों को दिए गए भुगतान से? दोनों फॉर्मूले का असर अलग-अलग कारोबारों पर बिल्कुल उलट पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 लागू होने के बाद एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे कैब, ऑटो, फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म) के लिए अपने गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए एक फंड में अंशदान करना अनिवार्य हो जाएगा। अब बहस इस बात पर है कि यह अंशदान किस आधार पर तय हो।
मॉडल 1 – टर्नओवर-बेस्ड: कंपनी के कुल सालाना कारोबार का एक निश्चित प्रतिशत फंड में जमा होगा। यही वो फॉर्मूला है जो संहिता की धारा 114(4) में पहले से मौजूद है।
मॉडल 2 – पेमेंट-बेस्ड: अंशदान सीधे कामगारों को किए गए भुगतान (पेआउट) के प्रतिशत के आधार पर लगेगा। श्रम और रोजगार मंत्रालय अब इसी मॉडल को मानक बनाने पर विचार कर रहा है।
विश्लेषकों और इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ तकनीकी बारीकी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला फैसला है। लेन-देन की संख्या, सेवाओं का मूल्य, बिज़नेस मॉडल और कुल कारोबार – हर पैमाने पर प्लेटफॉर्म कंपनियों का हुलिया अलग है, इसलिए दोनों व्यवस्थाओं का असर भी बेहद असमान होगा।
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 क्या कहता है?
संहिता के नियमों के मुताबिक, अंशदान का आकलन कर हर साल एग्रीगेटर को फंड में राशि जमा करनी होगी। प्रावधान साफ़ है:
धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत अंशदान देना होगा, लेकिन यह राशि गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को दिए गए कुल भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
यानी कानून की भाषा में दोनों रास्ते पहले से मौजूद हैं – अभी सिर्फ यह तय होना बाकी है कि किसे मानक बनाया जाए। मंत्रालय वैकल्पिक फॉर्मूले के तौर पर सीधे कामगारों के भुगतान के 5 प्रतिशत तक अंशदान वाली व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है। स्रोत – सोशल सिक्योरिटी कोड का सरकारी सार
साथ ही, लाभ पाने की पात्रता भी तय है – जो कामगार किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन या अलग-अलग एग्रीगेटरों के साथ कुल 120 दिन काम करता है, वह योजना के दायरे में आ जाएगा।
किस फॉर्मूले से किसे फायदा, किसे नुकसान?
यहीं से असली उलझन शुरू होती है। विश्लेषकों का मानना है कि पेमेंट-बेस्ड मॉडल उन कारोबारों पर असमान रूप से भारी बोझ डाल सकता है, जहाँ लेन-देन की संख्या बहुत ज़्यादा होती है लेकिन हर लेन-देन का मूल्य बहुत कम होता है।
इस सूची में सबसे ऊपर है राइड-हेलिंग सेक्टर – कैब, ऑटो और बाइक सेवाएँ। इनमें एक ड्राइवर दिन में दर्जनों ट्रिप पूरी करता है और हर ट्रिप पर छोटी रकम कमाता है। अगर अंशदान हर भुगतान के प्रतिशत पर लगा, तो इन कंपनियों का सालाना बोझ टर्नओवर-बेस्ड मॉडल के मुकाबले कई गुना बढ़ सकता है। इसके उलट, जिन कारोबारों में लेन-देन कम लेकिन मूल्य अधिक होता है, उन पर पेमेंट-बेस्ड मॉडल का असर हल्का पड़ेगा।
नंबरों में समझिए गिग इकॉनमी का स्केल
इस विवाद की असली कीमत समझने के लिए पहले गिग इकॉनमी का नक्शा देखिए:
| आँकड़ा | आंकड़ा (वेरिफाइड) |
|---|---|
| 2020-21 में गिग वर्कर्स | 77 लाख (7.7 मिलियन) |
| 2029-30 तक अनुमानित गिग वर्कफोर्स | 2.35 करोड़ (23.5 मिलियन) |
| गैर-कृषि कार्यबल में हिस्सेदारी (अनुमानित) | 6.7% |
| ई-श्रम पोर्टल पर प्लेटफॉर्म वर्कर रजिस्ट्रेशन में अग्रणी | महाराष्ट्र (1,34,705+, जनवरी 2026 तक) |
स्रोत: NITI Aayog — India’s Booming Gig and Platform Economy
यानी देश की करोड़ों की सेना का सामाजिक सुरक्षा कवच बनाने वाला फॉर्मूला अगर गलत चुना गया, तो सबसे ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी उन्हीं कंपनियों को, जो रोज़गार का सबसे बड़ा नया ज़रिया बन रही हैं। यही कारण है कि इंडस्ट्री इस फैसले को इतनी बारीकी से परख रही है।
सुरक्षा कवच की दिशा में सरकार के कदम
फॉर्मूला विवाद से इतर, गिग वर्कर्स को दायरे में लाने की दिशा में सरकार ने कई ठोस कदम पहले ही उठाए हैं:
- आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई: बजट 2025-26 में घोषणा की गई कि गिग वर्कर्स को आयुष्मान भारत के स्वास्थ्य कवच में लाया जाएगा – पहले चरण में 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को इसमें शामिल करने का लक्ष्य है।
- ई-श्रम पोर्टल: अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर के कामगारों (जिसमें गिग-प्लेटफॉर्म वर्कर भी शामिल हैं) के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के साथ रजिस्ट्रेशन की सुविधा।
- पेंशन: पीएम श्रम योगी मांधान के तहत ₹3,000 प्रति माह पेंशन का रास्ता भी इन कामगारों के लिए खुला है।
- राज्य स्तर पर प्रयोग: तेलंगाना ने अपने ड्राफ्ट बिल में एग्रीगेटरों के पेआउट का 1-2% वेलफेयर फंड फीस के तौर पर लेने का प्रस्ताव रखा है – यानी पेमेंट-बेस्ड मॉडल की अगुआई राज्य स्तर से शुरू हो चुकी है।
आगे की राह: दांव पर क्या है?
दरअसल दांव पर दो चीज़ें हैं – एक तरफ़ लाखों गिग कामगारों का भविष्य और उनकी सुरक्षा, दूसरी तरफ़ प्लेटफॉर्म इकॉनमी की लागत का ढाँचा। टर्नओवर-बेस्ड मॉडल में कंपनी का पूरा कारोबार (जिसमें गिग वर्कर की मेहनत से अर्जित राजस्व भी शामिल है) आधार बनता है, जबकि पेमेंट-बेस्ड मॉडल में सीधे कामगारों को दिया जाने वाला हिस्सा। दोनों में कर्मचारी-अनुकूल और कारोबार-अनुकूल पहलू हैं, लेकिन असमान असर ही सबसे बड़ी चिंता है।
मंत्रालय जिस भी मॉडल को मानक बनाए, एक बात तय है – भारत की गिग इकॉनमी अब अनियमित दायरे से निकलकर एक संस्थागत व्यवस्था में ढल रही है। फार्मूला चाहे जो भी हो, यह पहला मौका है जब देश इस करोड़ों की मेहनतकश फौज को औपचारिक सुरक्षा का आधार दे रहा है। बस ज़रूरत है एक ऐसे संतुलित फॉर्मूले की जो न तो कामगारों को न्याय से वंचित करे, न ही रोज़गार की नई राहों को रोके।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी अंशदान कितना है?
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 की धारा 114(4) के मुताबिक एग्रीगेटर को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% अंशदान देना होगा, लेकिन यह कामगारों को दिए गए कुल भुगतान के 5% से ज़्यादा नहीं हो सकता। श्रम मंत्रालय वैकल्पिक रूप से भुगतान-आधारित (पेमेंट का 5% तक) फॉर्मूले पर भी विचार कर रहा है।
सवाल 2: गिग वर्कर सोशल सिक्योरिटी लाभ के लिए कब पात्र होता है?
जो कामगार किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन या कई एग्रीगेटरों के साथ कुल 120 दिन काम करता है, वह योजना के लाभ का पात्र बन जाता है।
सवाल 3: पेमेंट-बेस्ड मॉडल का सबसे ज़्यादा असर किस पर पड़ेगा?
विश्लेषकों के मुताबिक राइड-हेलिंग (कैब, ऑटो, बाइक) जैसे ऊँचे लेन-देन वाले लेकिन कम मूल्य वाले कारोबारों पर पेमेंट-बेस्ड मॉडल का बोझ सबसे भारी पड़ सकता है।
सवाल 4: गिग वर्कर्स को सरकार ने कौन-कौन से लाभ देने की घोषणा की है?
बजट 2025-26 में आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई का स्वास्थ्य कवच 1 करोड़ गिग वर्कर्स तक बढ़ाने की घोषणा की गई है, साथ ही ई-श्रम पोर्टल पर UAN रजिस्ट्रेशन और पीएम श्रम योगी मांधान के तहत पेंशन का प्रावधान है।
स्रोत – NITI Aayog
इसे भी पढ़ें –
