राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: सरोगेसी से मां बनने वाली महिला कर्मचारियों को मिलेगा 180 दिन का मातृत्व अवकाश

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राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: सरोगेसी से मां बनने वाली महिला कर्मचारियों को मिलेगा 180 दिन का मातृत्व अवकाश
हरावल

जयपुर। राजस्थान सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो मां बनने की हर राह को सम्मान देने की कोशिश है। अब राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियां सरोगेसी (Surrogacy) के जरिए मां बनने पर भी पूरे 180 दिन यानी 6 महीने का मातृत्व अवकाश पा सकेंगी। यह सुविधा न सिर्फ सरोगेट मदर बनने वाली कर्मचारियों को, बल्कि सरोगेसी के जरिए बच्चा पाने वाली कमीशनिंग मदर को भी दी जाएगी।

एक नज़र में

  • क्या हुआ: राजस्थान सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1971 में संशोधन।
  • किसने जारी किया: कार्मिक विभाग की ओर से अधिसूचना।
  • कितना अवकाश: 180 दिन (6 महीने) – सरोगेट मदर और कमीशनिंग मदर, दोनों के लिए।
  • शर्त: केवल मान्यता प्राप्त सरोगेसी प्रक्रिया के तहत, अधिकृत चिकित्सा बोर्ड/सक्षम स्वास्थ्य अधिकारी का प्रमाण पत्र जरूरी।
  • सीमा: पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो जीवित बच्चों के जन्म/सरोगेसी मामलों तक।
  • क्यों जरूरी था: पहले सरोगेसी को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से अवकाश स्वीकृति में अड़चनें आती थीं।

50 साल पुराने नियम में पहली बार सरोगेसी की एंट्री

राजस्थान में अब तक महिला कर्मचारियों के अवकाश का पूरा ढांचा राजस्थान सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1971 के तहत चलता था, जो करीब पांच दशक पुराना है। इस नियम में सरोगेसी को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था, जिसकी वजह से सरोगेसी से मां बनने वाली कर्मचारियों को अवकाश की मंजूरी में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। हर बार प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग व्याख्या होती थी और कई बार अवकाश के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। अब सरकार ने इसी अंतर को दूर करते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन किए हैं, ताकि सरोगेसी से जुड़े मामलों में अवकाश की प्रक्रिया स्पष्ट और नियमबद्ध हो सके।

किन दो श्रेणियों को मिलेगा 180 दिन का अवकाश?

नए प्रावधान के तहत दो तरह की महिला कर्मचारियों को यह लाभ मिलेगा:

श्रेणीकौन हैअवकाश
सरोगेट मदरवह महिला कर्मचारी जो किसी अन्य दंपती के लिए सरोगेट मदर बनती है180 दिन (प्रसव से पहले और बाद की निर्धारित अवधि)
कमीशनिंग मदरवह महिला कर्मचारी जो सरोगेसी के जरिए अपने बच्चे को जन्म देती हैबच्चे की देखभाल के लिए 180 दिन

यानी चाहे आप किसी और के लिए सरोगेट मदर बनें, या सरोगेसी के जरिए खुद मां बनें – दोनों ही स्थितियों में 6 महीने का अवकाश सुनिश्चित किया गया है।

मिलेगा तभी, जब ये शर्तें पूरी होंगी

यह छुट्टी कोई सामान्य रियायत नहीं है, बल्कि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली बात – यह सुविधा सिर्फ मान्यता प्राप्त सरोगेसी प्रक्रिया के तहत ही लागू होगी। दूसरी बात, संबंधित कर्मचारी को अधिकृत चिकित्सा बोर्ड या सक्षम स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यानी सरोगेसी की प्रक्रिया कानूनी और मेडिकल दोनों तरह से मान्य होनी चाहिए।

दो जीवित बच्चों की सीमा

इस पूरी सुविधा पर एक अहम कैप भी लगाई गई है। यह लाभ महिला कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो जीवित बच्चों के जन्म या सरोगेसी के मामलों तक ही सीमित रहेगा। यानी अगर किसी कर्मचारी के पहले से ही दो जीवित बच्चे हैं, तो वह इस अवकाश का लाभ नहीं ले पाएगी। यह नियम परिवार नियोजन नीति के अनुरूप ही तय किया गया है।

कर्मचारियों को राहत, विभागों को साफ निर्देश

इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत उन महिला कर्मचारियों को मिलेगी, जो बच्चे की चाह में सरोगेसी जैसे विकल्प चुनती हैं और फिर अवकाश के लिए अनिश्चितता के बीच झूलती रहती थीं। कार्मिक विभाग के अनुसार, पहले सेवा नियमों में सरोगेसी को लेकर स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण महिला कर्मचारियों को अवकाश स्वीकृति में प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब नए प्रावधान से यह प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है।

राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि सरोगेसी से जुड़े आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई कर अवकाश स्वीकृत किया जाए। यानी अब किसी भी विभाग में इस मामले में लापरवाही या टालमटोल की गुंजाइश नहीं है।

केंद्र और अन्य राज्यों की तुलना: राजस्थान कहां खड़ा है?

यह फैसला अकेला नहीं है – केंद्र सरकार और कुछ अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठा चुके हैं:

  • केंद्र सरकार (2024): केंद्र ने अपने कर्मचारियों के लिए सेंट्रल सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स में संशोधन कर सरोगेसी से बच्चा पाने वाली महिला कर्मचारियों को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान किया।
  • ओडिशा: ओडिशा सरकार ने भी सरोगेसी का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों के लिए मातृत्व और पितृत्व अवकाश का प्रावधान किया है, जिसमें दो जीवित बच्चों तक की शर्त शामिल है।
  • राजस्थान हाई कोर्ट का सुप्रीम फैसला (2023): इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मातृत्व अवकाश देने में जैविक मां और सरोगेसी से मां बनी महिला के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने एक सरोगेट मदर को 180 दिन के मातृत्व अवकाश की मंजूरी दी थी।

यानी राजस्थान का यह कदम हाई कोर्ट के निर्णय और केंद्र की नीति के अनुरूप ही है, लेकिन इसे नियमों में स्थायी रूप से शामिल करने का काम अब पहली बार हुआ है।

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 का संदर्भ

इस फैसले को समझने के लिए यह भी जानना जरूरी है कि देश में सरोगेसी को लेकर कानूनी ढांचा क्या कहता है। भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 लागू है, जिसके तहत कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कानून अब केवल अल्ट्रूइस्टिक (परोपकारी) सरोगेसी की इजाजत देता है, जिसमें सरोगेट मदर को सिर्फ मेडिकल खर्च और बीमा की भरपाई की जाती है, कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं। ऐसे में राजस्थान का नया अवकाश प्रावधान उन्हीं कानूनी और मान्यता प्राप्त सरोगेसी मामलों पर लागू होगा, जो इसी अधिनियम के दायरे में आते हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में क्यों अहम है यह कदम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला महिला कर्मचारियों के लिए कई मायनों में बड़ा है। पहला – यह मानसिकता में बदलाव का संकेत है, क्योंकि सरोगेसी को अब सिर्फ ‘प्रक्रिया’ नहीं, बल्कि मां बनने का एक वैध और सम्मानित रास्ता माना गया है। दूसरा – सरोगेट मदर बनने वाली महिला कर्मचारी को भी पूरा अवकाश और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, जो पहले कई बार सवालों के घेरे में रहती थी। तीसरा – यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दे से जुड़ा है।

FAQs: आपके सवालों के जवाब

सवाल: यह अवकाश किन नियमों के तहत दिया जाएगा?
जवाब: राजस्थान सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1971 में संशोधन करके यह प्रावधान जोड़ा गया है। यह अधिसूचना कार्मिक विभाग ने जारी की है। Source

सवाल: सरोगेट मदर को कितने दिन का अवकाश मिलेगा?
जवाब: सरोगेट मदर बनने वाली महिला कर्मचारी को प्रसव से पहले और बाद की निर्धारित अवधि के लिए 180 दिन यानी 6 महीने का मातृत्व अवकाश मिलेगा।

सवाल: कमीशनिंग मदर को भी अवकाश मिलेगा?
जवाब: हां। सरोगेसी के जरिए बच्चे को जन्म देने वाली कमीशनिंग मदर को भी बच्चे की देखभाल के लिए 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।

सवाल: इसका लाभ लेने के लिए क्या करना होगा?
जवाब: अधिकृत चिकित्सा बोर्ड या सक्षम स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, और सरोगेसी प्रक्रिया मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

सवाल: क्या इस पर कोई सीमा है?
जवाब: हां। यह सुविधा महिला कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो जीवित बच्चों के जन्म या सरोगेसी के मामलों तक सीमित रहेगी।

सवाल: क्या यह सुविधा पहले भी थी?
जवाब: नहीं। पहले सेवा नियमों में सरोगेसी का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था, जिससे अवकाश स्वीकृति में प्रशासनिक दिक्कतें आती थीं। अब नए प्रावधान से प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

निष्कर्ष: शब्दों से आगे बढ़कर हकीकत में महिला सशक्तिकरण

यह फैसला भले ही सरकारी कर्मचारियों तक सीमित दिखे, लेकिन इसका संदेश बहुत व्यापक है। जब कोई राज्य सरकार कानूनी तौर पर यह स्वीकार करती है कि मां बनने का अधिकार सिर्फ जैविक मातृत्व तक सीमित नहीं है, तो यह समाज की सोच को भी बदलने का काम करता है। सरोगेट मदर की मेहनत और कमीशनिंग मदर की चाह – दोनों को अब कानूनी मान्यता और सरकारी आश्वासन मिला है। उम्मीद है कि इस मिसाल का असर दूसरे राज्यों पर भी दिखेगा, और मातृत्व के हर रूप को वही सम्मान मिलेगा जिसकी वह हकदार है। हम आपको इस फैसले से जुड़ी हर आगे की अपडेट से जोड़ते रहेंगे।

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