उदयपुर को 23 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, जल्द शुरू होगी सेवा; पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार

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उदयपुर को 23 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, जल्द शुरू होगी सेवा; पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार
हरावल

उदयपुर। झीलों की नगरी अब प्रदूषण मुक्त परिवहन की ओर तेज कदम बढ़ा रही है। शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ई-बस सेवा के विस्तार का काम जोरों पर है। स्वीकृत 50 इलेक्ट्रिक बसों में से 35 का आरटीओ पंजीयन पूरा हो चुका है, और अब 23 पंजीकृत बसें जल्द ही शहर की सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी

फिलहाल 12 बसें सड़कों पर यात्रियों को सेवा दे रही हैं। जब शेष 15 बसें भी आ जाएंगी, तो उदयपुर में 50 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार हो जाएगा। ये बसें राज्य को आवंटित 500 इलेक्ट्रिक बसों में से उदयपुर को मिली हैं, जो प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहर को मिलने वाली सौगात का हिस्सा हैं।

क्या है पूरा अपडेट? एक नजर में

स्थितिबसों की संख्या
शहर के लिए स्वीकृत कुल बसें50
आरटीओ में पंजीकृत बसें35
फिलहाल सड़कों पर चल रही बसें12
जल्द शामिल होने वाली नई बसें23
अभी आने बाकी बसें15

याद रहे, 18 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ई-बस सेवा का वर्चुअल शुभारंभ किया था, जिसके बाद शहर में पहले चरण में 10 रूटों पर बसें दौड़ने लगीं।

रूट प्लान में बड़ा बदलाव: अब यात्रीभार तय करेगा फैसला

बसों की संख्या बढ़ने के साथ ही सबसे अहम फैसला रूट और फेरों को लेकर होगा। फिलहाल आचार संहिता लागू होने के कारण ई-बसों का संचालन निर्धारित 10 रूटों पर ही किया जा रहा है।

अब प्रशासन की रणनीति पूरी तरह बदली है – पहले की तरह सिर्फ तय रूट के आधार पर बसें नहीं चलेंगी, बल्कि यात्रियों की संख्या, भीड़ के समय और मार्ग की जरूरत के हिसाब से संचालन तय होगा। इन मार्गों पर यात्रीभार का आकलन करने के बाद ज्यादा भीड़ वाले रूट पर अतिरिक्त बसें लगाने और फेरों की संख्या बढ़ाने की योजना है।

औद्योगिक इलाकों को मिलेगी प्राथमिकता

मादड़ी-कलड़वास और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूरों की आवाजाही होती है। यहां यात्रियों का दबाव अधिक रहने की संभावना है, इसलिए इन मार्गों पर बसों की संख्या और फेरों में बढ़ोतरी को प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे मजदूर वर्ग को सीधा फायदा होगा।

कॉलेज विद्यार्थियों को राहत

लंबे रूटों पर कॉलेज विद्यार्थियों की आवाजाही काफी रहती है। खासकर सुबह और दोपहर के समय इन मार्गों पर यात्रीभार बढ़ जाता है। ऐसे में बस संचालन को यात्रीभार के अनुसार ढाला जाएगा – मतलब पढ़ाई के समय (पीक आवर्स) में इन रूटों पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं।

लंबे रूट पर दोनों छोर से चलेंगी बसें

लंबे रूटों पर यात्रियों को एकतरफा यात्रा में परेशानी न हो, इसके लिए दोनों छोर से एक साथ बसें रवाना करने की व्यवस्था पर काम हो रहा है। जरूरत के अनुसार कुछ रूटों को आगे तक बढ़ाने और कुछ मार्गों में आंशिक बदलाव की संभावना भी है। रूट के पुनर्गठन में यात्रियों और संबंधित क्षेत्रों के लोगों की राय-मशविरा भी लिया जाएगा।

तीन नए टर्मिनल: अंबेरी, साइफन और प्रतापनगर

ई-बस सेवा के विस्तार के साथ संचालन की सुविधा के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में टर्मिनल विकसित करने की तैयारी है:

टर्मिनलस्थिति
धोल की पाटीफिलहाल मुख्य डिपो (संचालन जारी)
अंबेरीजगह फाइनल
साइफन बस स्टैंडस्थान मिल गया
प्रतापनगरजगह की तलाश जारी

नए टर्मिनल बनने के बाद ई-बसों को रात के समय शहर के अलग-अलग हिस्सों में खड़ा किया जा सकेगा। इससे संचालन में सुविधा होगी और अगले दिन अलग-अलग रूटों पर बसें समय पर रवाना करने में भी मदद मिलेगी।

किराया कितना होगा?

सूत्रों के मुताबिक ई-बसों का किराया डीजल बसों की तुलना में करीब 30 फीसदी सस्ता रखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए ₹10, लंबे शहरी रूटों पर ₹60 तक और एयरपोर्ट सेवा के लिए ₹100 तक का किराया तय किया गया है। (नोट: आधिकारिक किराया सूची के लिए UCTSL/परिवहन विभाग से पुष्टि जरूरी है।)

पर्यावरण और यात्रियों को डबल फायदा

  • प्रदूषण में कमी – डीजल बसों की जगह ई-बसें चलने से शहर की हवा साफ होगी
  • सस्ता सफर – ई-बसों का किराया पारंपरिक बसों से कम
  • एसी सुविधा – यात्रियों को आरामदायक वातानुकूलित यात्रा का अनुभव
  • आधुनिक सेवा – दिव्यांगजन के लिए रैंप सहित आधुनिक बसें शहर की छवि को भी बेहतर बनाएंगी

राजस्थान में इलेक्ट्रिक बस युग की शुरुआत जून 2026 में जयपुर और भीलवाड़ा में 47 ई-बसों के शुभारंभ के साथ हो चुकी थी। अब उदयपुर इस हरित क्रांति का अगला बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

FAQs: सामान्य सवाल-जवाब

सवाल: उदयपुर में कुल कितनी इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी?
जवाब: उदयपुर शहर के लिए 50 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हैं। इनमें से 35 का पंजीयन पूरा हो चुका है, 12 बसें फिलहाल चल रही हैं और 23 बसें जल्द शामिल होंगी। शेष 15 बसों के आने के बाद पूरा 50 का बेड़ा तैयार हो जाएगा।

सवाल: ई-बसें किन रूटों पर चलेंगी?
जवाब: फिलहाल आचार संहिता के कारण संचालन 10 निर्धारित रूटों पर हो रहा है। यात्रीभार के आकलन के बाद भीड़ वाले रूटों पर बसें बढ़ाई जाएंगी और कुछ रूटों में बदलाव भी संभव है।

सवाल: मादड़ी-कलड़वास जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में क्या फायदा मिलेगा?
जवाब: मादड़ी-कलड़वास और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की आवाजाही अधिक है, इसलिए इन मार्गों पर बसों की संख्या और फेरों में बढ़ोतरी को प्राथमिकता दी जाएगी।

सवाल: नए ई-बस टर्मिनल कहां बनेंगे?
जवाब: धोल की पाटी में मौजूदा मुख्य डिपो के अलावा अंबेरी और साइफन में टर्मिनल बनेंगे, जबकि प्रतापनगर में जगह की तलाश जारी है।

सवाल: ई-बसों का किराया डीजल बसों से कितना सस्ता है?
जवाब: रिपोर्ट्स के अनुसार ई-बसों का किराया डीजल बसों की तुलना में करीब 30 फीसदी कम है। आधिकारिक किराया सूची परिवहन विभाग/UCTSL जारी करता है।

अस्वीकरण: बसों की संख्या, रूट और किराए में प्रशासनिक बदलाव संभव हैं। नवीनतम आधिकारिक जानकारी के लिए UCTSL या राजस्थान परिवहन विभाग से संपर्क करें।

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